नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ने वाला है। उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कई कंपनियों ने अगस्त से अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। इस वर्ष यह तीसरी बार होगा जब कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार कच्चे माल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, समुद्री माल ढुलाई की बढ़ी लागत और आयात खर्च बढ़ने के कारण कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है। इसी वजह से चाय, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, कपड़े, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और यात्री वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त से लागू होने वाली नई कीमतों का असर त्योहारी खरीदारी पर भी पड़ सकता है। हालांकि कंपनियों का मानना है कि त्योहारों के मौसम से पहले यह कीमतों में आखिरी बढ़ोतरी हो सकती है और इसके बाद बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और माल ढुलाई की लागत कम होती है, तो भविष्य में कीमतों पर दबाव घट सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं को अगस्त से कई रोजमर्रा के सामान और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

Post a Comment