9 से 15 वर्ष की बच्चियों को निःशुल्क एचपीवी टीका, सर्वाइकल कैंसर से बचाव की बड़ी पहल

 

नई दिल्ली। सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर की रोकथाम के लिए दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने 9 से 15 वर्ष की बच्चियों के लिए निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य कम उम्र में ही बच्चियों को उस वायरस से सुरक्षा देना है, जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है।



विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जो त्वचा और शारीरिक संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। इसके कुछ प्रकार महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। विश्व स्तर पर सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है, लेकिन समय पर टीकाकरण और नियमित जांच से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


चिकित्सकों का कहना है कि 9 से 15 वर्ष की आयु में एचपीवी टीका सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता टीके के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देती है। आवश्यकतानुसार एक या दो खुराक दी जाती हैं, जिसका निर्णय आयु और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाता है।


विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह टीका सर्वाइकल कैंसर से बचाव का प्रभावी उपाय है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे चलकर नियमित स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। महिलाओं को निर्धारित आयु के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग भी करानी चाहिए।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे टीकाकरण को लेकर किसी भी भ्रम में न रहें और योग्य चिकित्सक की सलाह लेकर अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण कराएं। उनका कहना है कि जागरूकता, समय पर टीकाकरण और नियमित जांच से सर्वाइकल कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

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