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पांच साल पुराने 70 करोड़ के एमडी ड्रग्स मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

 


मनी लॉन्ड्रिंग एंगल में तीन गिरफ्तार, बैंक खाते, संपत्तियां और कारोबारी लेन-देन जांच के दायरे में


प्रणव बजाज


इंदौर। करीब पांच साल पहले इंदौर में पकड़ी गई 70 किलो एमडी ड्रग्स की खेप से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए वेदप्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अब ड्रग्स की सप्लाई से आगे बढ़कर बैंक खातों, नकद लेन-देन, कारोबारी गतिविधियों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है।



करीब 70 करोड़ रुपये कीमत की बताई गई एमडी ड्रग्स की बरामदगी के वर्षों बाद हुई इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह मामला केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित था या इसके पीछे करोड़ों रुपये का संगठित आर्थिक नेटवर्क भी सक्रिय था।


क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा दर्ज एनडीपीएस अधिनियम के मामले के आधार पर ईडी ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले, जिनमें ड्रग्स से अर्जित कथित रकम को व्यक्तिगत और कारोबारी बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित किए जाने का संदेह है।


अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि ड्रग्स से अर्जित कथित धन किन खातों में पहुंचा, किन लोगों तक गया, किन कारोबारों में लगाया गया और क्या उससे चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।


जांच आगे किस दिशा में जाएगी?


ईडी ने इंदौर और मंदसौर के कई ठिकानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इनकी जांच के बाद नए बैंक खाते, नए वित्तीय लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


बैंक खातों से नकदी तक हर लेन-देन पर नजर


जांच एजेंसी बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। यह भी जांच का विषय है कि कहीं कथित अवैध रकम को वैध कारोबारी आय के रूप में दिखाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

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