35 दिन की व्यवस्था के लिए 12 माह की कार्य अवधि क्यों? खर्च के अनुमान पर उठे सवाल
उज्जैन। भगवान श्री महाकालेश्वर की सावन-भादो में निकलने वाली सवारी के मार्ग पर बेरिकेटिंग व्यवस्था के लिए जारी करीब 67.77 लाख रुपये के टेंडर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब सवारी व्यवस्था का मुख्य कार्यकाल लगभग 35 दिनों का है, तो ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए 12 महीने की अवधि क्यों दी गई है?
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी निविदा में सवारी मार्ग पर स्टील बेरिकेटिंग लगाने, हटाने और संबंधित सामग्री के परिवहन सहित अन्य कार्यों के लिए लगभग 68 लाख रुपये का अनुमान तैयार किया गया है।
सवारी मार्ग पर बेरिकेटिंग लगाने की प्रक्रिया 3 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर को शाही सवारी के साथ पूरी होनी है। इसके बाद बेरिकेटिंग हटाने का काम किया जाएगा। ऐसे में निविदा में दर्ज 12 माह की कार्य अवधि को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
67.77 लाख के अनुमानित खर्च का गणि
टेंडर में तैयार अनुमान के अनुसार—
- गैस वेल्डिंग कार्य — लगभग 75 हजार रुपये
- स्टील बेरिकेटिंग लगाने का खर्च — लगभग 20 लाख रुपये
- बेरिकेटिंग हटाने का खर्च — लगभग 24 लाख रुपये
- लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, पीएचई स्टोर आदि से बेरिकेट और मशीनरी लाने-ले जाने का खर्च — लगभग 16 लाख रुपये
- स्टील प्राइमर सहित अन्य कार्य — लगभग 7.02 लाख रुपये
कुल अनुमानित लागत — 67.77 लाख रुपये
उठ रहे सवाल
- जब व्यवस्था कुछ सप्ताह की है तो कार्य अवधि 12 माह क्यों रखी गई?
- बेरिकेटिंग लगाने और हटाने की लागत में इतना अंतर क्यों है?
- सामग्री के परिवहन पर 16 लाख रुपये खर्च का आधार क्या है?
- क्या विभाग ने अनुमान तैयार करते समय बाजार दरों और वास्तविक आवश्यकता का मूल्यांकन किया?
महाकाल सवारी जैसी धार्मिक और जन आस्था से जुड़ी व्यवस्था में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता भी जरूरी है। अब देखना होगा कि विभाग इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध निविदा विवरण र उठाए जा रहे सवालों पर आधारित है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)

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