मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चुनावों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच हिंसा और तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों के संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) तथा कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 30 से अधिक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है और पाकिस्तान सरकार ने कई आरोपों से इनकार किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट, मीरपुर और अन्य क्षेत्रों में हजारों लोग चुनाव प्रक्रिया, आरक्षित सीटों और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे लोगों पर गोलीबारी की और व्यापक दमन अभियान चलाया। दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और सुरक्षा बलों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।
घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। कई स्थानों पर संचार सेवाओं पर प्रतिबंध, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और गिरफ्तारियों की भी खबरें हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय तथा मानवाधिकार संगठनों ने घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच, संयम बरतने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
भारत ने भी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जताई है और क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।

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