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नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने इथेनॉल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया कि इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है, बल्कि इसका उपयोग दुनिया में एक सदी से भी अधिक समय से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत भी अब स्वच्छ, सस्ता और आत्मनिर्भर ऊर्जा तंत्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पुरी ने कहा कि सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाला इथेनॉल पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प है और इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सहायता मिलती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसका लाभ किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं—तीनों को मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ हरित ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा परिवर्तन केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती का भी आधार है। सरकार आने वाले वर्षों में जैव ईंधन के उपयोग का दायरा और बढ़ाने पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इथेनॉल उत्पादन और वितरण की गति इसी तरह बढ़ती रही, तो भारत न केवल आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करेगा बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना सकेगा।

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