ठंडी आइस्ड टी या दूध वाली गर्म चाय, मौसम के हिसाब से किसे चुनना चाहिए? जानिए विशेषज्ञों की राय
गर्मी का मौसम आते ही लोग शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले पेय पदार्थों की तलाश करने लगते हैं। ऐसे में आइस्ड टी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, लेकिन चाय प्रेमियों का एक बड़ा वर्ग आज भी दूध वाली गर्म चाय को ही प्राथमिकता देता है। सवाल यह है कि तेज गर्मी के दौरान स्वास्थ्य के लिहाज से कौन-सी चाय बेहतर मानी जाती है? आयुर्वेद इस विषय पर दिलचस्प दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
आयुर्वेद के अनुसार किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ का असर केवल उसके तापमान से नहीं, बल्कि उसके गुणों और शरीर की प्रकृति पर पड़ने वाले प्रभाव से तय होता है। इसलिए केवल ठंडा होने के कारण कोई पेय हमेशा बेहतर नहीं माना जा सकता।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार बहुत अधिक ठंडे पेय पदार्थ शरीर की पाचन अग्नि को कमजोर कर सकते हैं। आइस्ड टी का अत्यधिक सेवन करने से कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याएं, गैस, अपच या गले में परेशानी हो सकती है। खासकर जब इसे बार-बार और बड़ी मात्रा में पिया जाए।
वहीं सीमित मात्रा में पी गई दूध वाली गर्म चाय पाचन क्रिया को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। गर्म पेय शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने और भोजन के पाचन में सहायक माने जाते हैं। हालांकि इसमें चीनी और कैफीन की मात्रा संतुलित रखना जरूरी है।
आइस्ड टी के फायदे और सावधानियां
आइस्ड टी शरीर को ताजगी और ठंडक का एहसास देती है। यदि इसे कम चीनी और प्राकृतिक सामग्री के साथ तैयार किया जाए तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन बाजार में मिलने वाली कई आइस्ड टी में चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने और ब्लड शुगर को प्रभावित करने का कारण बन सकती है।
दूध वाली गर्म चाय कब बेहतर?
आयुर्वेद के अनुसार सुबह या शाम सीमित मात्रा में गर्म चाय पीना अधिक संतुलित माना जाता है। अदरक, इलायची या तुलसी जैसी सामग्री मिलाकर बनाई गई चाय शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी सहारा दे सकती है। हालांकि दिनभर में कई कप चाय पीना स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता।
गर्मी में चाय पीते समय रखें ये बातें
खाली पेट अधिक चाय पीने से बचें।
बहुत ज्यादा चीनी वाली चाय का सेवन न करें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें।
चाय के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य स्वस्थ पेय भी लें।
यदि एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्या है तो सेवन सीमित रखें।
आयुर्वेद की दृष्टि से गर्मी में केवल ठंडा पेय चुनना ही सही नहीं होता। सीमित मात्रा में दूध वाली गर्म चाय पाचन और शरीर के संतुलन के लिए बेहतर मानी जा सकती है, जबकि आइस्ड टी का सेवन भी संयम के साथ किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी पेय का अत्यधिक सेवन करने के बजाय शरीर की जरूरत और अपनी प्रकृति के अनुसार संतुलन बनाए रखा जाए।

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