शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलने की तैयारी, वैश्विक ऊर्जा बाजार में लौटी स्थिरता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली है। समझौते की खबर सामने आते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में सकारात्मक माहौल बन गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 से 5 प्रतिशत तक गिर गई। वहीं तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता भी कम हुई है। सबसे अहम बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे वैश्विक तेल परिवहन सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। किसी भी प्रकार का तनाव या नाकेबंदी वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करती है। अब स्थिति सामान्य होने से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट काफी हद तक कम हो सकता है।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने का सीधा असर आयात लागत पर पड़ सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है
वैश्विक बाजार में बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि जानकारों का कहना है कि तेल कीमतों में स्थायी गिरावट इस बात पर निर्भर करेगी कि समझौते की शर्तें कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं और क्षेत्र में शांति कितने समय तक बनी रहती है। फिलहाल इस घटनाक्रम को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है।

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