नई दिल्ली। भारत में मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया स्वास्थ्य आंकड़ों ने संकेत दिया है कि जहां कुछ शहरी क्षेत्रों में पुरुषों की फिटनेस में सुधार देखा जा रहा है, वहीं महिलाओं में मोटापे के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय बनती जा रही है। इसके साथ ही बढ़ता ब्लड शुगर स्तर भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में मोटापा बढ़ने के पीछे शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनियमित जीवनशैली, तनाव, हार्मोनल बदलाव और प्रसव के बाद वजन नियंत्रण में कठिनाई जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं। घर और काम की दोहरी जिम्मेदारियों के चलते कई महिलाएं अपने स्वास्थ्य और नियमित व्यायाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पातीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि इससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और जोड़ों की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी ब्लड शुगर को प्रभावित कर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकती है।
दूसरी ओर, कुछ महानगरों में पुरुषों के बीच फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ी है। जिम, रनिंग, योग और संतुलित आहार को अपनाने की प्रवृत्ति ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार किया है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह रुझान पूरे देश की तस्वीर नहीं दर्शाता और मोटापा अब भी एक व्यापक चुनौती बना हुआ है।
मोटापे और बढ़ते ब्लड शुगर से बचने के लिए क्या करें?
रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करे
जंक फूड, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी रखें
भोजन में फल, सब्जियां और फाइबर युक्त आहार शामिल करें।
पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करें।
नियमित रूप से ब्लड शुगर और वजन की जांच कराएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में मोटापा और मधुमेह देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा बोझ बन सकते हैं। ऐसे में जागरूकता, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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