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G7 में दुनिया जल रही थी, 'मेलोडी' ट्रेंड कर रही थी!The world was on fire at G7, 'Melody' was trending!

 

 प्रणव बजाज 

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन चल रहा था। दुनिया के बड़े नेता युद्ध, अर्थव्यवस्था, जलवायु संकट, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अस्थिरता जैसे गंभीर मुद्दों पर चिंतन कर रहे थे। कहीं मिसाइलें चल रही थीं, कहीं तेल की कीमतें उछल रही थीं, कहीं महंगाई जनता की जेब खाली कर रही थी। लेकिन सोशल मीडिया की जनता का ध्यान इन सब पर नहीं था।




उसे इंतजार था कि आखिर 'मेलोडी' कब आएगी?

जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी आमने-सामने आए, कैमरों में चमक आ गई। ऐसा लगा मानो संयुक्त राष्ट्र का कोई प्रस्ताव पारित नहीं होने वाला, बल्कि इंस्टाग्राम का नया एल्गोरिद्म लॉन्च होने वाला हो। मेलोनी ने मुस्कुराकर कहा कि "हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं।" यह सुनकर दुनिया को समझ आ गया कि अब कूटनीति विदेश मंत्रालय नहीं, सोशल मीडिया मैनेजर भी चलाते हैं।

पुराने जमाने में देशों के रिश्ते समझौतों से मजबूत होते थे। नेता घंटों वार्ता करते थे, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होते थे, संयुक्त घोषणाएं जारी होती थीं। अब दौर बदल गया है। अब एक टॉफी, एक सेल्फी और एक वायरल रील भी दो देशों के रिश्तों की नई परिभाषा लिख सकती है।

कभी लोग पूछते थे कि भारत और इटली के बीच व्यापार कितना बढ़ा? रक्षा सहयोग कहां तक पहुंचा? निवेश कितना आया? अब सवाल बदल गए हैं। जनता जानना चाहती है कि अगली मुलाकात में कौन-सी टॉफी दी जाएगी और उसका वीडियो कितने करोड़ व्यूज बटोरेगा।

राजनीति भी समय के साथ आधुनिक हो गई है। पहले नेता भाषण से लोकप्रिय होते थे, अब रील से होते हैं। पहले विदेश नीति फाइलों में बनती थी, अब वह ट्रेंडिंग हैशटैग में भी दिखाई देती है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने शायद कभी कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन कूटनीतिक सफलता का पैमाना लाइक्स और कमेंट्स भी बन जाएंगे।

दुनिया के कई देशों के नेता वर्षों तक मेहनत करते हैं कि उनकी कोई पहल अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आए। इधर एक टॉफी ने वह काम कर दिया, जो कई बार अरबों डॉलर के प्रचार अभियान भी नहीं कर पाते। इसे ही डिजिटल युग का चमत्कार कहा जाता है।

वैसे इसमें गलती जनता की भी नहीं है। जब चारों तरफ तनाव, संकट और नकारात्मक खबरें हों, तब किसी नेता की मुस्कुराहट और एक हल्का-फुल्का पल लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन खतरा तब है जब हम मनोरंजन और राजनीति के बीच की रेखा ही भूल जाएं।

G7 में दुनिया के सामने खड़े संकटों पर लंबी चर्चा हुई होगी, अनेक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए होंगे। लेकिन सोशल मीडिया के इतिहास में शायद इस सम्मेलन को उस बात के लिए ज्यादा याद रखा जाएगा कि यहां 'मेलोडी' की जोड़ी फिर दिखाई दी थी।

और यही डिजिटल युग का सबसे बड़ा व्यंग्य है—दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाएं संकटों का समाधान खोज रही थीं, जबकि इंटरनेट यह तय करने में व्यस्त था कि 'मेलोडी मोमेंट पार्ट-2' पहले से ज्यादा वायरल हुआ या नहीं।

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