संघ के मंच पर मौजूदगी को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस, भाजपा ने आरोपों को बताया तुष्टीकरण की राजनीति
केरल में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम में Mohan Bhagwat की मौजूदगी के बीच कुलपतियों की भागीदारी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सवाल उठाए हैं।
विवाद उस समय बढ़ गया जब राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और संवैधानिक पदों की निष्पक्षता से जोड़कर देखा जाने लगा। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने भी कुलपतियों के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर आपत्ति जताई और स्पष्टीकरण की मांग की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विवाद में जिन कुलपतियों के नाम सामने आए हैं, उनमें Mohan Kunnummal, Ciza Thomas और K. Sivaprasad शामिल बताए जा रहे हैं। इनकी कार्यक्रम में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने भी मोर्चा संभाल लिया। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी शैक्षणिक कार्यक्रम या वैचारिक मंच में भाग लेना गलत नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार और विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कुलपतियों को विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेने की स्वतंत्रता है, जबकि विरोधी दलों का तर्क है कि संवैधानिक और शैक्षणिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक या वैचारिक विवादों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
इस मुद्दे ने केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार और राजनीतिक दलों के बीच बहस का बड़ा विषय बना रह सकता है।

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