उज्जैन शैलेंद्र सिंह कुशवाहा
उज्जैन : श्री महाकालेश्वर मंदिर में करोड़ों की लागत से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन व्यवस्था को ध्यान में रख विकास कार्य चल रहे हैं. मंदिर के गेट नंबर 4 के समीप टनल के लिए खुदाई का काम जारी है. शुक्रवार अलसुबह 4 बजे जमीन से 8 फीट की गहराई में छोटी प्राचीन गुफा व उसके अंदर अति दुर्लभ शिवलिंग जलाधारी निकला है. इंजीनियर और मजदूरों ने इसकी सूचना मंदिर प्रबंधन समिति को दी. इसके बाद मंदिर प्रबंधन समिति ने पुराविद् अधिकारी व कलेक्टर को जानकारी दी.
खुदाई के दौरान मिली छोटी गुफा
इंजीनियर सतीश राजपूत ने बताया "शिवहरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बीते एक माह से टनल बनाने के लिए खुदाई का काम चल रहा है. टनल की 8 फीट खुदाई के दौरान अलसुबह 04 बजे महाकाल मंदिर के गेट नंबर 4 एवं सम्राट विक्रमादित्य हैरिटेज होटल के बीच एक छोटी गुफा और उसमें रखा शिवलिंग मिला है. यहीं पर चौखट का स्ट्रक्चर भी मिला."
ये शिवलिंग अति दुर्लभ है. ये प्रथम शताब्दी का हो सकता है. महाकाल की ये नगरी है. इसका अपना वैभव रहा है. ऐसे में खुदाई में शिवलिंग निकलना आम बात है. प्राचीन काल मे कई राजा-महाराजाओं ने शिवलिंग की स्थापना कर मंदिरों का निर्माण करवाया. आक्रांताओं द्वारा मंदिर ध्वस्त किए गए. इसके बाद मंदिरों का राजाओं ने जीर्णोद्धार करवाया. हजारों साल पुराने शिवलिंग यथास्थिति में खुदाई के दौरान मिलते हैं. खुदाई में आज भी अधिकतर ऐसे शिवलिंग निकलते हैं, जो गुफाओं में थे, जहां कभी आक्रांता पहुंच नहीं सके."
इस शिवलिंग में विक्रमादित्य के काल की ब्राह्मी लिपि लिखी है, संस्कृत भाषा में भी लिखा है, जो प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व की हो सकती है. अभी चूंकि मिट्टी चढ़ी है, इसका केमिकल ट्रीटमेंट होने के बाद स्पष्ट होगा कि ये दुर्लभ शिवलिंग है या नहीं. उज्जैन में जब 1937 में उत्खनन हुआ और फिर 1956, 1962 व हाल ही में वर्ष 2020 में भी उत्खनन किया गया तो महाकाल मंदिर में छठी शताब्दी से लेकर अशोक मौर्य, विक्रमादित्य के काल तक की यशोगाथा के साक्ष्य मिले हैं."

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