भोपाल। National Green Tribunal ने भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता और जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। शहर के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने, जल संकट की स्थिति और पानी की जांच व्यवस्था में खामियों को लेकर ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मामला उस शिकायत से जुड़ा है जिसमें दावा किया गया कि भोपाल के कई इलाकों में सप्लाई हो रहे पानी में प्रदूषण के संकेत मिले हैं। जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आने के बाद लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। ई-कोलाई बैक्टीरिया आमतौर पर दूषित पानी और सीवेज मिलावट का संकेत माना जाता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि शहर में पानी की गुणवत्ता की नियमित और वैज्ञानिक जांच पर्याप्त तरीके से नहीं हो रही है। कई क्षेत्रों में पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिश्रण की शिकायतें भी सामने आई हैं।
ट्रिब्यूनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और जल प्रदाय एजेंसियों से पूछा है कि पानी की जांच किस स्तर पर और कितनी नियमितता से की जा रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि दूषित पानी की शिकायतों को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
भोपाल में बढ़ती आबादी और गर्मी के मौसम के बीच जल संकट का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है। कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने और कम दबाव से जल वितरण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जल गुणवत्ता की निगरानी और पाइपलाइन सुधार पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अब सभी की नजर NGT के सामने पेश होने वाली रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।

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