भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संभावित जोखिम को देखते हुए पूरी रणनीति के साथ तैयारी शुरू कर दी है। 21 जून 2026 को राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव मई के अंतिम सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार दो सीटें भाजपा के खाते में जाना तय माना जा रहा है, जबकि एक सीट कांग्रेस को मिल सकती है।
हालांकि, यदि भारतीय जनता पार्टी तीसरा प्रत्याशी उतारती है, तो कांग्रेस के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।
वरिष्ठ नेताओं ने बनाई रणनीति
नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में हुई बैठक में कमल नाथ, दिग्विजय सिंह, हरीश चौधरी और जीतू पटवारी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह तय किया गया कि सभी वरिष्ठ नेता विधायकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखेंगे और नियमित संवाद के जरिए उन्हें एकजुट रखा जाएगा।
विधायकों की संख्या बनी चिंता का कारण
230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास वर्तमान में 64 विधायक थे, लेकिन कुछ परिस्थितियों के चलते प्रभावी संख्या घटकर लगभग 62 रह गई है। इनमें एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो चुकी है, एक के मतदान पर रोक है और एक अन्य पर दलबदल का मामला चल रहा है। ऐसे में पार्टी के पास जरूरी संख्या से केवल चार विधायक अधिक हैं।
क्रॉस वोटिंग का खतरा
पार्टी को आशंका है कि अन्य राज्यों की तरह यहां भी क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थिति की स्थिति बन सकती है। हाल ही में बिहार और हरियाणा के राज्यसभा चुनावों में इस तरह के उदाहरण सामने आ चुके हैं, जिससे कांग्रेस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
भोपाल में होगी अहम बैठक
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद कांग्रेस सभी विधायकों को भोपाल बुलाकर उन्हें मतदान प्रक्रिया की जानकारी देगी। पार्टी का प्रयास है कि किसी भी प्रकार की चूक न हो और एकमात्र सीट सुरक्षित रूप से जीत ली जाए।

Post a Comment