इंदौर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने करण गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष विजय राठी सहित सात के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। राठी पर 3 करोड़ 37 लाख रुपये कीमती जमीन का 50 लाख में सौदा कर संस्था के सदस्यों से धोखा करने का आरोप है। पुलिस सहकारिता अफसर और सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
एसपी (ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव के अनुसार संस्था की सर्वे क्रमांक-285/1,286/1,289,236/1(2) की भूमि है। 20 मार्च 2005 को आम सभा में सदस्यों के साथ निर्णय लिया गया कि भूमि का सौदा कर सदस्यों के लिए अन्य जगह पर जमीन ली जाएगी। 2 मई 2005 को उप पंजीयक ने कलेक्टर गाइड लाइन से सौदा करने की अनुमित भी दे दी।
भूमि को मात्र 50 लाख में बेचकर सदस्यों के साथ किया धोखा
2008-09 की अंकेक्षण की जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी ने उक्त भूमि को मात्र 50 लाख रुपये में बेच कर सदस्यों के साथ धोखा किया है। रिपोर्ट के बाद सदस्यों द्वारा आपत्ति ली तो राठी ने एंट्री घुमाने के लिए 3 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपये संस्था के खाते में उक्त राशि जमा करवाई मगर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली गई। अध्यक्ष ने न तो जमीन खरीदी न ही सदस्यों की मदद की।
पत्नी और साथी की कंपनियों में जमा कर डाले 3.37 करोड़ रुपये
निरीक्षक योगेंद्रसिंह सिसोदिया ने मामले की जांच की और बैंक खातों को खंगाला। विजय राठी ने तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेसकोर्स रोड) और रामकुंवर बिल्डर्स (श्रीराम नगर) के खातों का उपयोग किया था। रामकुंवर बिल्डर्स में एंड डेवलपर्स में विजय की पत्नी नम्रता राठी और अभय पुष्करलाल पुराणिक निवासी श्रीराम नगर, ज्योति पुराणिक डायरेक्टर थी। जबकि तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर में खुद विजय राठी डायरेकटर था। उसने दोनों कंपनियों के खातों में संस्था की राशि ट्रांसफर कर ली थी। बाद में रुपयों को अलग अलग तरीकों से निकाला गया।

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