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मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगीMathura stampede: High Court takes a tough stand, seeks a complete crowd and crisis management plan



प्रयागराज से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में बार-बार हो रही भगदड़ जैसी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि क्या शहर में भीड़ और आपदा से निपटने के लिए कोई ठोस और समग्र योजना मौजूद है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने साफ कहा कि धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान भारी भीड़ के कारण सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा बन रहा है, खासकर प्रमुख धार्मिक स्थलों पर। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। 

अदालत ने जिला प्रशासन से यह भी पूछा कि भीड़ प्रबंधन के लिए कौन-कौन सी रणनीतियां अपनाई जा रही हैं, क्या कोई विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था है, और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय कैसे किया जा रहा है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अगर भगदड़ जैसी घटनाओं पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन या रिपोर्ट तैयार की गई है तो उसे अदालत के सामने पेश किया जाए। 

मामले की सुनवाई एक याचिका पर हो रही है, जिसमें मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने दायरा बढ़ाते हुए भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के मुद्दे को भी शामिल कर लिया। 

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण जैसी समस्याएं राहत और बचाव कार्यों में बड़ी बाधा बनती हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति और खतरनाक हो जाती है। इसलिए प्रशासन को न केवल भीड़ नियंत्रण बल्कि शहरी प्रबंधन पर भी गंभीरता से काम करना होगा। 

इस आदेश के बाद अब जिला प्रशासन को विस्तृत हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि भीड़ और संकट प्रबंधन के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत के इस सख्त रुख को भविष्य में बड़े हादसों को रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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