भोपाल ।बौद्धिक प्रतिकार
डॉ. केपी यादव के निगम अध्यक्ष बनने के बाद अंदरूनी खींचतान तेज, पार्टी नेतृत्व ने संभाली स्थिति
मध्यप्रदेश भाजपा में एक बार फिर अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia और सांसद डॉ. KP Yadav के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर छिड़ी बयानबाजी के बाद अब पार्टी संगठन को स्थिति संभालने के लिए सक्रिय होना पड़ा है।
दरअसल डॉ. केपी यादव को निगम अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही भाजपा के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच लगातार पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, जिससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर दिखाई देने लगी।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा संगठन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि अंदरूनी विवाद का असर आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक छवि पर पड़े।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुना-शिवपुरी क्षेत्र की राजनीति में सिंधिया और केपी यादव के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है। लोकसभा चुनाव में केपी यादव द्वारा सिंधिया को हराने के बाद यह मुकाबला प्रदेश राजनीति का बड़ा विषय बन गया था। हालांकि बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं, लेकिन दोनों खेमों के बीच दूरी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
भाजपा के भीतर बढ़ती गुटबाजी को लेकर विपक्ष भी लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा में अंदरूनी संघर्ष अब सार्वजनिक होता जा रहा है।
फिलहाल पार्टी संगठन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कोशिश की जा रही है कि मामला ज्यादा न बढ़े। आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर समन्वय बैठकों की संभावना भी जताई जा रही है।

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