ग्वालियर। Madhya Pradesh High Court ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रमुख सचिव के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गैर-जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह कार्रवाई अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं किए जाने पर की।
मामला पीएचई विभाग के सेवानिवृत्त दिवंगत कर्मचारी प्रमोद कुमार जैन से जुड़ा है। विभाग ने वर्ष 2018 में उनकी पूरी पेंशन रोक दी थी। आरोप था कि वर्ष 2001 से 2005 के बीच विभाग में वित्तीय गड़बड़ियां हुई थीं, जिसमें बैंक से अधिक राशि निकाली गई लेकिन खातों में कम रकम दर्ज की गई। इस मामले में विभागीय जांच भी हुई थी।
हालांकि, पेंशन रोके जाने तक प्रमोद कुमार जैन का निधन हो चुका था और उनकी पत्नी मोहिनी जैन को पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। इसके बाद मोहिनी जैन ने 2018 में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जिस मामले को आधार बनाकर पेंशन रोकी गई, उसकी जांच वर्ष 2008 में ही पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद करीब 10 साल बाद पेंशन पर रोक लगाई गई। साथ ही नियम 9(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी की पूरी पेंशन रोकी नहीं जा सकती, न्यूनतम पेंशन देना अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता वीके छारी अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि मामला विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि के विचाराधीन है और आदेश के पालन के लिए दो सप्ताह का समय मांगा गया।
अदालत ने समय तो दिया, लेकिन प्रमुख सचिव की अनुपस्थिति और आदेश की अवहेलना पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि स्पष्ट निर्देश के बावजूद प्रमुख सचिव न तो अदालत में पेश हुए और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दिया। साथ ही वर्ष 2023 में पारित आदेश का पालन भी अब तक नहीं किया गया।
इसी के चलते अदालत ने प्रमुख सचिव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए, ताकि उनकी 13 मई 2026 को कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
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