प्रणव बजाज
Indore/Ujjain Excise Scam : मध्यप्रदेश आबकारी विभाग एक बार फिर विवादों में है। इंदौर के चर्चित 42 करोड़ रुपए के चालान घोटाले में नाम आने वाले सहायक जिला आबकारी अधिकारी एवं वेयरहाउस प्रभारी सुखनंदन पाठक पर अब करोड़ों रुपए की शराब बिना मूल्य संशोधन के बाजार में भेजने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और लोकायुक्त तक पहुंच गई है।
शिकायत के अनुसार उज्जैन स्थित बाबा फूड प्रोडक्ट वेयरहाउस से शराब ठेकेदार जायसवाल बंधुओं को बकार्डी लेमन ब्रांड की शराब बिना संशोधित मूल्य स्टिकर लगाए सप्लाई की गई। आरोप है कि वर्ष 2026 में पूरे मध्यप्रदेश में इस ब्रांड की अधिकतम कीमत 1530 रुपए और न्यूनतम 1330 रुपए निर्धारित थी, जबकि उज्जैन जिले में बिक रही बोतलों पर पुरानी कीमत अधिकतम 1275 और न्यूनतम 1105 रुपए अंकित मिले। इसके बावजूद शराब को उपभोक्ताओं को करीब 1600 रुपए में बेचा गया।
आरोप लगाया गया है कि मार्च में नए ठेके निष्पादित होने के बाद एक माह के भीतर मूल्य संशोधन स्टिकर लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन वेयरहाउस से पूरे वर्ष पुरानी कीमतों वाला माल निकाला जाता रहा। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे ठेकेदारों को करोड़ों का अवैध लाभ पहुंचाया गया।
मामले में सहायक आबकारी आयुक्त, संभागीय आबकारी उपायुक्त हर्षवर्धन राय और वेयरहाउस प्रभारी सुखनंदन पाठक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार निरीक्षण और मूल्य सत्यापन की जिम्मेदारी होने के बावजूद अधिकारियों ने अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
इधर, सुखनंदन पाठक का नाम पहले से चर्चित 42 करोड़ रुपए के चालान घोटाले में भी सामने आता रहा है। आरोप है कि इंदौर के देसी शराब वेयरहाउस में हुए इस घोटाले के दौरान वे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाले पद पर तैनात थे। विभागीय जांच चलने के बावजूद वर्षों से इंदौर के अंग्रेजी शराब वेयरहाउस में उनकी पदस्थापना बने रहने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग में पिछले कई वर्षों से बड़े स्तर पर तबादले नहीं होने के कारण कई अधिकारी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और धार जैसे जिलों में लंबे समय से जमे हुए हैं। विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि मलाईदार पोस्टिंग बचाने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जोर-आजमाइश चल रही है।
आबकारी आयुक्त Abhijeet Agrawal की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे थे। विपक्षी हलकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप और विभागीय जांच चल रही है, उन्हें संवेदनशील पदों से हटाने के बजाय संरक्षण दिया जा रहा है।
वहीं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वाणिज्यकर मंत्री Jagdish Devda पर भी कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ रहा है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि ट्रांसफर सूची को लेकर मंत्री बंगले और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच खींचतान जारी है।
फिलहाल पूरे मामले में ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से जांच की मांग की गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल मूल्य गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आबकारी विभाग और शराब कारोबारियों की मिलीभगत का बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।

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