मणिपुर में 7 अप्रैल को हुए रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद से लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। आजकल महिलाएं इस आंदोलन में सबसे आगे हैं। वे न सिर्फ सड़कों पर धरना दे रही हैं, बल्कि रात में मशाल रैलियों का नेतृत्व भी कर रही हैं। यह पहली बार है जब मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं इतनी उग्र तरीके से सामने आई हैं। ये महिलाएं दिन में सड़कों को रोककर, धरने दे कर आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं। यह स्थिति पुलिस के लिए भी चुनौती बन गई है, क्योंकि वे वहां से निकल नहीं पा रहे हैं।
आंदोलन का बढ़ता गर्मी, महिलाओं की खास भूमिका
इम्फाल वेस्ट में सड़क जाम कर रही रीमा ने कहा कि हर इलाके में क्लब और मेइरा पाइबी समूह हैं, जो अन्य महिलाओं को जोड़कर इस आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया कि घर संभालना, आंदोलन में शामिल होना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को एक साथ चलाना बहुत मुश्किल है। लेकिन इसके बावजूद मेरा मानना है कि यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं सब कुछ संतुलित करने की कोशिश कर रही हूं।
आर्थिक दबाव बना रहा, महिलाएं मजबूर हुईं
लगातार बंद की वजह से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट के कुछ महिला विक्रेता अपने सामान बेचने के लिए मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने बताया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे कहती हैं कि काम के बाद वे फिर से आंदोलन में शामिल होंगी। जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ रही है, महिलाएं और भी ज्यादा सक्रिय हो रही हैं।
बड़ी योजना का ऐलान, आंदोलन का अगला चरण
नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है। 80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए बने मेइरा पाइबी संगठन ने इस समय फिर से सक्रियता दिखाई है। उनका उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना है, ताकि लोग मिलकर समस्याओं को सुलझा सकें।
इतिहास से जुड़े आंदोलन और मानवाधिकारों का मुद्दा
इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन और अफस्पा के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है। इरोम शर्मिला, जो इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं, ने दुनिया का ध्यान मणिपुर की ओर आकर्षित किया था। इस बार महिलाओं के आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया है।
हालिया हिंसा का सिलसिला और उसके परिणाम
6 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में हुए बम हमले के बाद स्थिति अत्यंत टेढ़ी हो गई। जब बम ने एक घर में घुसा, दो छोटे बच्चे अपनी मां के साथ सो रहे थे, उसी समय उनकी मौत हो गई। इसके चलते प्रदर्शनकारी भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर स्थित CRPF कैंप पर हमला कर दिया। ये सभी घटनाएं मणिपुर में चल रहे आंदोलन का हिस्सा हैं और अब सभी की नजरें आगे की गतिविधियों पर हैं।
पुरानी जंग फिर गरमाई, नए सिरे से दबाव
मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा। मौजूदा सरकार की नाकामियों के चलते हालात जटिल हो गए।

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