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जीत मिले या हार,जेल तो ममता जाएंगी ही Whether she wins or loses, Mamata will definitely go to jail.

 



                          • रवि उपाध्याय दबंग देश


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान एक दिन बाद यानि 29 अप्रैल बुधवार को होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में 8 जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। जिन 8 जिलों में बुधवार को वोट डाले जाने वाले हैं। उनमें कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, नदिया, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व बर्धमान और पश्चिम बर्धमान। मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल को 152 सीटों पर हुआ था । पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। दोनों चरणों में डाले गए मतों की गणना सोमवार 04 मई को होगी। अंतिम परिणाम इसी दिन देर शाम तक सामने आ जाएंगे।


राजनैतिक पंडितों और समीक्षकों का यह मानना है कि पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनावों के बाद किसी की भी सरकार बने लेकिन यह तय है कि ममता बनर्जी को चुनाव परिणामों के बाद कई कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 08 जनवरी 2026 को कोयला घोटाला केस मामले में कोलकाता में आई पैक पर रेड डालने के विरुद्ध आपराधिक हस्तक्षेप करने पर ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी संभव है। इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान उनके द्वारा हाल ही में अनुसूचित जाति के खिलाफ की गई अनुचित टिप्पणी के खिलाफ भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति - जनजाति आयोग ने ममता बनर्जी को नोटिस भेजा है। इस पर उनसे तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। इस मामले में भी उनके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है। इसके अलावा ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी कई मामलों में आरोपी बताए जाते हैं।


29 अप्रैल को जिन 142 विधानसभा क्षेत्रों में बुधवार को मतदान होना है। इन क्षेत्रों में 2021में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा इनमें से केवल 18 सीटें ही जीत सकी थी। जबकि 123 सीटों पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली थी। बुधवार को जिन विधान सभा क्षेत्रों में मतदान होना है उनमें मुख्य मंत्री ममता बनर्जी की हाई प्रोफाइल सीट भवानीपुर भी शामिल है। यहां से उन्हें भाजपा के मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल विधानसभा के विपक्ष के नेता सुवेन्दु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं। बतला दें कि पिछले 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेन्दु अधिकारी नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हरा चुके हैं।सुवेंदु अधिकारी इस बार दो विधान सभा क्षेत्रों नंदीग्राम और भवानीपुर से चुनाव मैदान में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुवेंदु अधिकारी इस बार भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पराजित कर सकेंगे ?


बुधवार को पश्चिम बंगाल में जिन 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है। इन सभी क्षेत्रों में टीएमसी ने अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी भी सभी क्षेत्रों में किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा ने 141 तथा सीपीआईएम ने 100 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए हैं। दूसरे चरण में निर्दलीयों समेत कुल 1448 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें हुमायूं कबीर और ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार भी शामिल हैं।


जेल जाएंगी ममता बनर्जी ? राजनीतिक और विधिवेत्ताओं का मानना है कि 4 मई को आने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम भले ही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पक्ष में आएं या उनकी पार्टी को विधानसभा चुनावों में बहुमत न मिले पर इतना तो तय है कि गिरफ्तारी संभव है। उन पर सरकारी जांच में बाधा डालने और महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन कर ले जाने का गंभीर मामले दर्ज हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गंभीर टिप्पणी कर चुका है। यह घटना 08 जनवरी 2026 को हुई थी। 


क्या हुआ था ? 


आपको बता दें कि 8 जनवरी 2026 को ED ( प्रवर्तन निदेशालय) की टीम ने कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास और साल्टलेक स्थित ऑफिस पर कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की थी। छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं। वहां उन्होंने जांच टीम से कुछ दस्तावेज जो एक बैग में रखे थे छीन लिए और उन्हें लेकर वहां से चली गईं। न्यूज़ चैनलों में ममता बनर्जी को अपने साथ हरे रंग का एक बैग ले जाते हुए भी दिखाया गया था। वीडियो में उनके साथ उच्च पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। इतना ही नहीं बंगाल पुलिस आई -पैक की जांच करने वाली टीम के अधिकारियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली।


इस घटना को लेकर ED सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ED ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने अधिकारियों से आपत्तिजनक सामग्री वाली फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सबूत छीन लिए, और एक अफसर का मोबाइल भी ले गईं। साल्टलेक ऑफिस से लौटते वक्त उनके हाथ में एक हरे रंग की फाइल थी। 


इसके बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR और CBI जांच की मांग की थी। 


सुप्रीम कोर्ट में -


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को “बहुत गंभीर” बताया और कड़ी टिप्पणियां कीं। 1 - सुप्रीम कोर्ट ने घटना को गंभीर बताया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा: “यह बहुत गंभीर मामला है। हम नोटिस जारी करेंगे। हमें इसकी समीक्षा करनी होगी।”


2. केंद्रीय जांच में राज्य के हस्तक्षेप पर फटकार : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि _“यह मामला केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य सरकार के हस्तक्षेप से जुड़ा है। यदि इसे अनदेखा किया गया, तो यह कानूनहीनता की स्थिति पैदा कर सकता है”।

3. मुख्यमंत्री की दखल को गलत ठहराया । सुप्रीम कोर्ट में 22 अप्रैल 2026 की सुनवाई में जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि _“जब कोई राज्य का मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की जांच में जाकर दखल देता है तो इसे सिर्फ केंद्र या राज्य के बीच विवाद के तौर पर नहीं देखा जा सकता”। कोर्ट ने ममता बनर्जी की उस हरकत को गलत बताया जिसमें वह ED की छापेमारी के दौरान वह साल्टलेक स्थित प्रतीक जैन की संस्था आई पैक के आफिस सह घर पहुंच गईं थीं ।


4. ED का आरोप कोर्ट में रखा गया 


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि _“यह सीधे तौर पर चोरी है। यदि ऐसे आचरण को बर्दाश्त किया गया तो ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूट जाएगा”। ED का आरोप है कि ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं, तीखी बातचीत की और कुछ दस्तावेज बलात अपने साथ ले गईं। 



सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने पश्चिम बंगाल की चौंकाने वाली स्थिति का जिक्र किया है. ईडी का आरोप है कि ये वाकया तो कानून के संरक्षक मुख्यमंत्री और पुलिस अफसरों के ही ऐसे संज्ञेय अपराध में शामिल होने का है. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के 'ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' के 2014 के फैसले के मुताबिक FIR दर्ज कराना जरूरी है। ईडी ने सीएम के पास गृह होने का हवाला दिया है और उनके साथ डीजीपी, कोलकाता पुलिस आयुक्त, पुलिस उप आयुक्त और बाकी पुलिस अफसर भी थे। ये सभी गंभीर अपराध में शामिल हैं। ऐसे में FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास जाना बेकार होगा। ED ने कहा आशंका ये भी है कि ऐसा हुआ तो स्थानीय पुलिस सीएम और सीनियर पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए जांच भी ठीक से नहीं करेगी।

5. कोर्ट के अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 3 FIR पर रोक लगा दी और 8 जनवरी की छापेमारी के सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की ED जांच में दखल को “असाधारण स्थिति” और “कानून के शासन” से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना, और कहा कि ऐसा न रोका गया तो _“अन्य राज्यों में भी अराजकता फैलेगी”। यह 

मामला अभी विचाराधीन है, अगली सुनवाई की तारीखें कोर्ट तय कर रहा है।

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