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बाघ को जंगल दिखेगा तभी वह रास्ता पार करेगा', एमपी हाईकोर्ट ने सड़क के नीचे टाइगर के लिए बन रहे रास्ते को बताया अनुचित'A tiger will cross a road only when it sees the forest', the MP High Court said the construction of a path for tigers under the road was unfair.

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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बैतूल-भोपाल फोरलेन प्रोजेक्ट का तहत केसला-भौंरा-बरेठा के जंगल में चल रहे सड़क निर्माण के मामले पर असंतोष व्यक्त किया है। कोर्ट ने कहा कि सड़क के नीचे से टाइगर के लिए रास्ता बना रहे हैं, वह पूरी तरह अनुचित है। टाइगर का स्वभाव है कि उसे सामने जंगल दिखेगा, तभी वह रास्ता पार करेगा।

जिस तरह से उसके जाने के लिए संकरा रास्ता बना रहे हैं, उससे वह कभी नहीं गुजरेगा और कभी भी रोड पर आएगा। इससे टाइगर के साथ लोगों की जान को भी खतरा रहेगा। कोर्ट ने कहा कि जब 19.5 किमी के जंगल में से 10.5 किमी का हिस्सा ऊपर से ले जाने की सिफारिश पहले से की जा चुकी है, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।



टाइगर की जान को खतरा

कोर्ट ने कहा कि सड़क किनारे यदि बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क पार कैसे करेंगे। कोर्ट ने एनएचएआइ को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा। अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।

अमरावती महाराष्ट्र निवासी अद्वेत क्योले की ओर से दायर याचिका में बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 49 को फोरलेन में तब्दील करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। दलील दी गई है कि सड़क बनाने से वन्य जीवों को सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने में काफी परेशानी होगी और उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहेग।

अधिकारियों को तलब किया

एक अप्रैल, 2022 को हाई कोर्ट ने सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। बीते 23 मार्च, 2026 को हाई कोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने से इन्कार कर दिया था। साथ ही नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी व नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को तलब किया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट में मौजूद दोनों विभागों के जिम्मेदार अधिकारी हाई कोर्ट के सवालों का उचित जवाब नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से विकास कार्यों के कारण छत्तीसगढ़ के हाथियों ने मप्र का रुख किया है, ठीक वैसे ही इस फोरलेन के कारण मप्र के टाइगर भी पलायन करने लगेंगे।

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