राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने तथाकथित जमीन के बदले नौकरी मामले में उनके खिलाफ सीबीआई की एफआईआर और आरोप पत्र रद्द करने से इंकार कर दिया है। हालांकि न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 77 वर्षीय लालू प्रसाद को निचली अदालत में उनको व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की छूट दे दी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दलील दी की इस मामले में पूर्वानुमति की जरूरत नहीं है जबकि बचाव पक्ष ने कहा कि जांच की स्वीकृति न मिलने से पूरी कार्यवाही अवैध हो जाती है। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोप पत्र और एफआईआर रद्द करने की श्री लालू यादव की याचिका खरिज कर दी थी और कहा था कि वर्ष 2018 में लागू हुई धारा 17 ए, 2004 से 2009 के बीच किए गए अपराधों पर लागू नहीं होती। यह मामला रेल मंत्री के रूप में श्री यादव के कार्यकाल के दौरान रेलवे में कथित रूप से अनियमित नियुक्तियों से संबंधित है जिसके बदले श्री लालू के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों को जमीन हस्तांतरित की गई थी।

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