नई दिल्ली। देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग की निगरानी में 12 राज्यों की मतदाता सूची से कुल 5.18 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर
सूत्रों के मुताबिक, हटाए गए नामों में सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश से बताई जा रही है, जबकि दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल है। इसके अलावा अन्य बड़े राज्यों में भी व्यापक स्तर पर सूची संशोधन किया गया है।
आखिर क्यों हटाए गए इतने नाम?
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत SIR प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करना है। इस दौरान जिन कारणों से नाम हटाए गए, उनमें प्रमुख हैं:
एक ही व्यक्ति के नाम का कई जगह दर्ज होना (डुप्लीकेट एंट्री)
स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण
मृत्यु के बाद नाम अपडेट न होना
लंबे समय से मतदान में भाग न लेना और सत्यापन में अनुपस्थिति
कैसे होती है यह प्रक्रिया
SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर सत्यापन किया जाता है। इसके बाद संदिग्ध या अपात्र प्रविष्टियों को चिन्हित कर सूची से हटाया जाता है। इस प्रक्रिया में दावा-आपत्ति का मौका भी दिया जाता है, ताकि कोई पात्र मतदाता गलती से बाहर न हो।
राजनीतिक असर भी संभव
इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों की नजर इस पूरी प्रक्रिया पर टिकी है। कई दल पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे नियमित और आवश्यक प्रक्रिया बता रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची का यह बड़ा अपडेट चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब देखना होगा कि दावा-आपत्ति के बाद कितने नाम दोबारा जोड़े जाते हैं और अंतिम सूची कैसी बनती है।

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