होर्मुज जलडमरुमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी के एलान के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर झोंक दी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं। यह सिर्फ गश्त नहीं बल्कि एक सुनियोजित सैन्य दबाव रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका ने अरब सागर में अपने अत्याधुनिक युद्धपोत को भी उतारा है, जो अपने आप में एक चलता-फिरता एयरबेस माना जाता है।
यूएसएस त्रिपोली पर 20 से ज्यादा F-35B Lightning II स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं, साथ ही MV-22 Osprey जैसे मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर भी मौजूद रहते हैं। इसका डिजाइन ऐसा है कि यह एक साथ बड़े स्तर पर एयर ऑपरेशन चला सकता है, जिससे समुद्र और हवा दोनों से हमले की क्षमता मिलती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि नाकेबंदी के करीब आने वाली किसी भी ईरानी नाव को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उनका दावा है कि ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा पहले ही खत्म किया जा चुका है और जो छोटे हमलावर जहाज बचे हैं, उन्हें भी खतरा नहीं माना जाएगा।
इस बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरुमध्य से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में अगर यहां हालात बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिससे भारत समेत कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दबाव का खेल भी है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजरें इस अहम समुद्री रास्ते पर टिकी हैं, जहां कोई भी छोटी घटना बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है।

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