देश में महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चल रही बहस के बीच महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़े आंकड़े नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के नेतृत्व में संचालित हो रही है। यह बदलाव न केवल महिलाओं की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उनके बढ़ते योगदान को भी रेखांकित करता है।
एमपी में 8.87 लाख MSME
28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 8,87,087 पंजीकृत MSME इकाइयां हैं। इनमें से 2,28,959 इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। यानी प्रदेश की लगभग हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के हाथ में है, जो आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है।
6 साल में 6 गुना बढ़ा महिला रोजगार
महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां MSME क्षेत्र में 1,53,493 महिलाएं कार्यरत थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,07,995 हो गई है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि महिलाएं न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
उद्यम पोर्टल से मिली गति
वर्ष 2020-21 में उद्यम पोर्टल शुरू होने के बाद महिला उद्यमियों की संख्या में तेजी आई। उस समय 14,239 महिला स्वामित्व वाले MSME थे। 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 और 2023-24 में 7,44,746 तक पहुंच गई। 2025-26 में यह संख्या 2,28,959 पर दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा महिलाओं का दबदबा
देशभर में भी महिला उद्यमिता तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले MSME पंजीकृत हो चुके हैं। महाराष्ट्र MSME पंजीकरण में अग्रणी है, जबकि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस सूची में मजबूत स्थिति में हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर
एमपी के ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय और उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यह बदलाव नारी शक्ति के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है।

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