इंदौर। धार के ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर मामले में गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब इस पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि आगामी सोमवार से इस केस पर हर रोज सुनवाई की जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बहस की शुरुआत में पहले याचिकाकर्ताओं के तर्कों को सुना जाएगा, जिसके बाद आपत्तिकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इस गंभीर मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ द्वारा की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं सदी का यह स्मारक कमाल मौला मस्जिद है। वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है। हाल ही में कोर्ट के आदेश पर एएसआई द्वारा भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी किया गया था, जिसका उद्देश्य इसकी ऐतिहासिक प्रकृति और मूल संरचना का पता लगाना था।
16 मार्च को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर से संबंधित याचिकाओं की नियमित सुनवाई के लिए दो अप्रैल से पहले की तारीख निर्धारित की थी और कहा था कि वह स्थल का निरीक्षण करेगा।
दो जजों ने धार में किया था परिसर का निरीक्षण
28 मार्च को हाई कोर्ट के दो जजों ने धार में परिसर का निरीक्षण किया। सात अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार परिसर में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति है।

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