मध्यप्रदेश में एक बार फिर टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के एक टेंडर में तकनीकी बोली (टेक्निकल बिड) से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, जिनमें नियमों में बदलाव कर खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है।
मामले में आरोप है कि टेंडर की प्रक्रिया के दौरान ऐसे बदलाव किए गए, जिससे कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा मिल सके। खासतौर पर तकनीकी पात्रता (eligibility) से जुड़े नियमों में बदलाव कर प्रतिस्पर्धा को सीमित करने की कोशिश बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में “तकनीकी बिड” सबसे अहम चरण होता है, जहां कंपनियों की योग्यता तय होती है। यदि इसी स्तर पर नियमों में फेरबदल हो जाए, तो कई योग्य कंपनियां बाहर हो सकती हैं और केवल पसंदीदा कंपनियां ही फाइनल रेस में बचती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी होती है। मध्यप्रदेश में पहले भी ई-टेंडरिंग से जुड़े मामलों में हेरफेर और पक्षपात के आरोप लग चुके हैं, जहां बोली प्रक्रिया में छेड़छाड़ कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने की बात सामने आई थी।
ऐसे मामलों में आम तौर पर आरोप यह होता है कि—
तकनीकी शर्तें बाद में बदली जाती हैं
कुछ कंपनियों को अयोग्य घोषित कर बाहर किया जाता है
और अंत में सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच ठेका तय किया जाता है
कानूनी दृष्टि से भी अदालतें साफ कर चुकी हैं कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है, और किसी भी तरह की मनमानी या पक्षपात न्यायिक जांच के दायरे में आ सकता है।
फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच या कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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