नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अगुवाई में भारत ने हाल के घटनाक्रमों के बीच बहुस्तरीय रणनीति अपनाते हुए ‘तिहरा दांव’ खेला है, जिसमें विदेश मंत्री S. Jaishankar, वरिष्ठ राजनयिक Vikram Misri और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने अलग-अलग मोर्चों पर कमान संभाली।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने प्रमुख देशों के साथ संवाद तेज करते हुए यह संदेश दिया कि भारत न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक संतुलन का अहम खिलाड़ी बन चुका है। उनकी कूटनीति का फोकस रणनीतिक साझेदारी और बहुपक्षीय सहयोग पर रहा।
वहीं, प्रधानमंत्री के करीबी और अनुभवी राजनयिक विक्रम मिस्री ने पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई। उच्चस्तरीय वार्ताओं, बैक-चैनल संपर्कों और संवेदनशील मामलों में समन्वय कर उन्होंने भारत की स्थिति को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी रणनीति ने कई जटिल मुद्दों पर गतिरोध कम करने में मदद की।
दूसरी ओर, ऊर्जा कूटनीति के मोर्चे पर हरदीप सिंह पुरी सक्रिय रहे। वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ संपर्क बनाए रखा। सस्ती और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘तिहरा दांव’ भारत की बहुस्तरीय कूटनीति का उदाहरण है, जहां एक तरफ राजनीतिक नेतृत्व दिशा तय करता है, वहीं अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञ उसे जमीन पर लागू करते हैं। इससे भारत की वैश्विक छवि एक मजबूत, संतुलित और निर्णायक शक्ति के रूप में उभरी है।
कुल मिलाकर, मोदी सरकार की यह रणनीति दिखाती है कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि एजेंडा सेट करने वाला राष्ट्र बनता जा रहा है।

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