मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक किसी भी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन के लिए फुल-टाइम मेडिकल प्रैक्टिशनर का होना अनिवार्य है, लेकिन जांच में सामने आया है कि कई डॉक्टरों के नाम एक साथ कई अस्पतालों में दर्ज हैं—मानो वे एक ही समय में कई जगह सेवाएं दे रहे हों।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ डॉक्टरों का नाम एक-दो नहीं बल्कि 5 से 7 अलग-अलग अस्पतालों में दर्ज पाया गया। हैरानी की बात यह है कि ये अस्पताल अलग-अलग शहरों में स्थित हैं—ऐसे में एक ही समय में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठना लाजिमी है। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह खेल कागजों में डॉक्टर दिखाकर अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन कराने का है। यानी वास्तविक सेवाएं कोई और दे रहा है, जबकि दस्तावेजों में दूसरे डॉक्टरों के नाम चल रहे हैं। इससे न केवल नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
जांच के दौरान जिन नामों की चर्चा सामने आई है, उनमें कुछ डॉक्टरों के नाम कई जिलों के अस्पतालों में एक साथ दर्ज पाए गए। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
वहीं, संबंधित डॉक्टरों ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें इस तरह के रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी या उनके नाम का दुरुपयोग किया गया है। कुछ ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया है।
फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल बन गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों के भरोसे के साथ भी बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा।

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