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महंगाई और अंतरराष्ट्रीय हालात पर घिरी कांग्रेस, अंदरूनी बयानबाजी बनी नई चुनौती
नई दिल्ली।
LPG कीमतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग सुर सामने आने से पार्टी असहज स्थिति में आ गई है। दो वरिष्ठ नेताओं के बयान पार्टी लाइन से हटकर नजर आए, जिससे विपक्ष को ही नहीं बल्कि सत्तापक्ष को भी हमला बोलने का मौका मिल गया।
कांग्रेस जहां एक ओर केंद्र सरकार को महंगाई और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के लिए घेर रही है, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कारणों—खासकर मिडिल ईस्ट संकट—को भी कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा कारण बताया है। इस अलग रुख ने पार्टी के हमले को कमजोर करने का काम किया है।
इसी मौके को भुनाते हुए केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद ही तय नहीं कर पा रही कि वह किस मुद्दे पर क्या स्टैंड रखती है। एक तरफ सरकार को दोष देती है, तो दूसरी तरफ अपने ही नेता वैश्विक हालात को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सिंधिया ने तंज कसते हुए कहा कि “जब पार्टी के अंदर ही एक राय नहीं है, तो जनता कैसे भरोसा करेगी?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालती है, लेकिन ठोस समाधान देने में नाकाम रहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी के भीतर एकरूपता का अभाव विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर सकता है। खासकर तब, जब महंगाई जैसे मुद्दे पर जनता पहले से ही परेशान है।
फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि अंदरूनी मतभेद आने वाले समय में पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

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