पटना। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित लौंडा नाच को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग लेने लगा है।
इस कार्यक्रम का विडियो तेजस्वी यादव ने साझा किया था। इसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी नाच का आनंद उठाते दिख रहे हैं।
वीडियो साझा किए जाने के बाद आलोचना तेज हुई, जिस पर अब रोहिणी आचार्य ने कड़ा जवाब दिया है। सिंगापुर में रह रहीं रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा पोस्ट करते हुए आलोचकों को आड़े हाथों लिया।
सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा
उन्होंने कहा कि 'लौंडा नृत्य' बिहार और पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है, जिसे बिना समझे निशाना बनाया जा रहा है।
रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह नृत्य परंपरा सदियों पुरानी है और सामाजिक संदेश देने का एक सशक्त माध्यम रही है।
उन्होंने इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय भिखारी ठाकुर को देते हुए कहा कि उन्होंने इस विधा के जरिए पलायन, दहेज, शराबखोरी और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों को उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाओं के मंच पर आने पर सामाजिक पाबंदियां थीं, तब पुरुषों ने महिला वेश में यह नृत्य कर परंपरा को जीवित रखा। आज भी भोजपुरी भाषी क्षेत्रों और विदेशों—खासकर कैरिबियन देशों—में यह परंपरा जीवित है।
रोहिणी आचार्य ने आलोचकों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी मंचों पर फूहड़ गीतों पर होने वाले नृत्य पर चुप रहने वाले लोग, पारंपरिक कला पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने रामचंद्र मांझी जैसे कलाकारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उम्र के अंतिम पड़ाव तक इस परंपरा को जीवित रखने में योगदान दिया।
सियासी और पारिवारिक संकेत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लालू परिवार में रिश्तों की बदलती तस्वीर भी नजर आ रही है। हाल के दिनों में तेज प्रताप यादव की परिवार से बढ़ती नजदीकियों के साथ ही रोहिणी आचार्य की सक्रियता भी बढ़ी है।कुल मिलाकर देखें तो लौंडा नाच को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सांस्कृतिक बनाम राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।

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