प्रणव बजाज
महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती उभर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार आतंकी संगठन ISIS अब ‘लोन वुल्फ’ रणनीति के जरिए युवाओं को निशाना बना रहा है, जिसमें अकेले व्यक्ति को भड़काकर हमला करवाया जाता है।
दिल्ली और महाराष्ट्र की एजेंसियों को मिले इनपुट बताते हैं कि यह पैटर्न पहले केरल में ज्यादा सक्रिय था, लेकिन अब महाराष्ट्र में भी तेजी से फैलने की कोशिश हो रही है।
हाल ही में ठाणे में दो सुरक्षा गार्डों पर हुए हमले को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हमलावर ने कथित तौर पर इसे आईएस में शामिल होने की दिशा में पहला कदम बताया था।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह हमला संगठन के “मैनुअल” के अनुरूप था, जो पिछले कई वर्षों से ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर ऐसे युवाओं को निशाना बनाया जाता है जो अकेलेपन, असफलता या अवसाद से जूझ रहे होते हैं। ऑनलाइन माध्यमों के जरिए उन्हें धीरे-धीरे कट्टरपंथ की ओर धकेला जाता है।
इसी महीने मुंबई के कुर्ला और खडावली इलाकों से दो संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई थी, जिन पर आरोप है कि वे आईएस मॉड्यूल से जुड़े थे और रिमोट कंट्रोल्ड उपकरणों के जरिए हमले की योजना बना रहे थे।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ठाणे जिले के कुछ इलाके, जैसे बोरीवली-पडघा, और पुणे का कोंढवा क्षेत्र भी निगरानी में हैं, जहां संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं।
फरवरी 2025 में एटीएस ने अहिल्यानगर और यवतमाल में कई स्थानों पर छापेमारी कर ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की कार्रवाई की थी।
अधिकारियों का कहना है कि अब यह संगठन पारंपरिक ट्रेनिंग कैंप की बजाय ऑनलाइन कट्टरपंथ पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसमें युवाओं को खुद ही हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए प्रेरित किया जाता है।
इस रणनीति में हमले के लिए साधारण साधनों के उपयोग की सलाह दी जाती है, जिससे किसी बड़े नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती और हमले का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज और परिवार की जागरूकता भी जरूरी है, ताकि युवाओं को समय रहते गलत रास्ते पर जाने से रोका जा सके।

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