पहले बच्चों का बचपन मैदान, दौड़-भाग और खेलकूद में गुजरता था। अब वही समय मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीत रहा है। साथ ही खान-पान की आदतें भी बदल गई हैं। ज्यादा कैलोरी वाला लेकिन कम पोषण वाला खाना आसानी से मिल जाता है। इसका असर अब साफ दिख रहा है। जो बीमारियां पहले उम्र बढ़ने पर होती थीं, अब वे युवाओं और बच्चों में भी दिखने लगी हैं।
'युवा पीढ़ी में बढ़ता मोटापा एक गंभीर संकट है। यह अब सिर्फ कुछ लोगों की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इसके पीछे बैठे रहने की आदत, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब पोषण अहम कारण हैं।'
भारत में कितनी गंभीर समस्या है मोटापा
भारत में मोटापा और ज्यादा वजन अब भारी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। हालिया आकलनों के अनुसार करीब 45 करोड़ भारतीय ओवरवेट या मोटापे के शिकार हैं। इसका मतलब कि लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित है। इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों की बड़ी हिस्सेदारी ह
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के डेटा के मुताबिक, करीब 24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट या मोटापे की कैटेगरी में आते हैं। स्थिति और गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि यह समस्या अब बच्चों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। World Obesity Atlas 2026 के मुताबिक भारत में लगभग 4.1 करोड़ बच्चे (5 से 19 साल) ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित हैं। हालिया विश्लेषण यह भी संकेत देते हैं कि 30 साल से कम उम्र के लोगों में वजन बढ़ने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।
बदलती जीवनशैली और बढ़ती परेशानी
आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गई है। लंबे समय तक बैठना, बाहर कम निकलना और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाना... ये सब मिलकर वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन रहे हैं। इसी वजह से टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारी जैसी समस्याएं अब कम उम्र में ही देखने को मिल रही हैं। दुनिया भर के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों और किशोरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
मोटापा अकेले नहीं आता
मोटापा अपने साथ कई और बीमारियां भी लेकर आता है। जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी। ये सभी आपस में जुड़े होते हैं और एक-दूसरे को और ज्यादा गंभीर बना देते हैं।

Post a Comment