भोपाल। राजेंद्र भारती पर सजा के फैसले से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति, खासकर दतिया क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता ने भारतीय जनता पार्टी में उनके बढ़ते दबदबे के संकेत दे दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दतिया की राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रहे घटनाक्रम ने बीजेपी के अंदर समीकरण बदल दिए हैं। राजेंद्र भारती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के चलते स्थानीय नेतृत्व में खालीपन की स्थिति बनती दिख रही है, जिसका सीधा फायदा नरोत्तम मिश्रा को मिल सकता है।
नरोत्तम मिश्रा, जो पहले भी दतिया से मजबूत पकड़ रखते रहे हैं, हाल के दिनों में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती भागीदारी और केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क को उनकी संभावित वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजेंद्र भारती के खिलाफ फैसला प्रतिकूल आता है, तो दतिया में बीजेपी नए नेतृत्व की ओर बढ़ सकती है, जिसमें नरोत्तम मिश्रा सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।
वहीं पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मिश्रा का अनुभव और संगठन में पकड़ उन्हें फिर से प्रमुख भूमिका में ला सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दतिया की राजनीति किस दिशा में जाती है और बीजेपी नेतृत्व इस पर क्या फैसला लेता है।
केंद्रीय मंत्री के ओएसडी ने 70 करोड़ ऑफर किए
पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने बताया कि मई 2024 में एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी ने उनसे मुलाकात की थी। दिल्ली में हुई इस मुलाकात में ओएसडी ने मुझे नरोत्तम मिश्रा का संदेश देते हुए सारे केस वापस लेकर भाजपा में आने को कहा था। इतना ही नहीं, निगम-मंडल का अध्यक्ष बनाने के साथ नुकसान की भरपाई में 70 करोड़ रुपए का भी ऑफर दिया। ऐसा नहीं करने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने कहा कि वे केंद्रीय मंत्री के ओएसडी का नाम भी वक्त आने पर सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एफडी मामले में गवाहों पर दबाव बना कर न्यायालयीन प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

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