• रवि उपाध्याय
देश को 21 वीं सदी में एक महत्वपूर्ण शब्द की उपलब्धि हासिल हुई है और वह शब्द है 'खेला होबे'। यह शब्द कोहिनूर हीरा जैसा मूल्यवान शब्द है। इसी शब्द का चमत्कार है कि हमारे देश और पूरी दुनिया में खेला हो रहा है। यह शब्द राष्ट्रीय वाक्य बन कर लोगों की जुबान पर चढ़ गया। खेला होबे - खेला होबे ।
वैसे तो खेला होबे शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'खेल होगा' होता है । लेकिन सियासी दलों ने इस शब्द के साथ ही खेला कर के इस शब्द का अर्थ साजिश करना बना दिया है। अब यह शब्द एक धमकी भरा शब्द बन कर रह गया। 2026 के साल को यदि खेला होबे वर्ष कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसी तरह अभी तक की घटनाओं और परिदृश्य को देखते हुए भले ही हमारे प्रधानमंत्री के परम मित्र डोनल्ड ट्रंप को नोबल शांति सम्मान नहीं मिल सका हो पर यह अवश्य है कि उन्हें साल, 2026 का 'खेला पुरूष' का सम्मान तो दिया ही जाना चाहिए। नोबल पीस प्राइज़ न मिलने से भनभनाए ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को सपत्नीक उठवालिया और वहां के तेल के कुँओं पर कब्जा कर लिया। उनकी इस बहादुरी की तुलना पौराणिक कथा सीता हरण से की जा सकती है। हाल की घटना में ट्रंप भाई दशानन से ज्यादा उदार निकले वो राष्ट्रपति को सपत्नीक उठा कर ले गए।
ऐसा लगता है कि पिछले जन्म में जरूर इस आदमी का तेल का कारोबार रहा होगा। शायद यही कारण है कि भाई को जहां भी तेल का भंडार नज़र आता है ये वहां टूट पड़ता है। जैसे ही इसकी आंखों पर तेल चढ़ जाता है यह आदमी प्रसन्न हो जाता है। हमारे यहां शनि ग्रह का इफेक्ट कम करने के लिए शनि देव की मूर्ति पर तेल चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शनि महाराज प्रसन्न हो जाते हैं और मनुष्य पर शनि ग्रह का प्रकोप कम हो जाता है। यही हाल अमेरिका के इन शनि महाराज का है। जैसे ही इनको तेल का चढ़ावा मिल जाता है यह शांत हो जाते हैं। यह भी हो सकता है कि यह व्यक्ति किसी श्राप से ग्रसित हो कर पिछले जन्म में कोल्हू से तेल निकालने का काम करता हो। शायद इसी का असर है कि भाई को जहां भी तेल दिखाई देता है ये भाई वहां खेला कर देता है। अक्सर यह देखा गया है कि पुराने जमाने में कोल्हू से तेल निकालने का काम जो बैल करता था वह भी खूब सफेद झक गोरा चिट्ठा होता था।
दुनिया के शासकों के इतिहास में डोनल्ड ट्रंप एक मात्र ऐसे शासक हैं जो इतने अमन पसंद हैं कि जिस देश में जहां अमन होता है वहां पहले वो युद्ध करवाते हैं। इसके लिए दूसरे देश को हथियार देते हैं और अपने हथियार बेचने के बाद वहां फिर से शांति बहाल करवाने के लिए अपनी मिसाइलें और बमों का इस्तेमाल कर पीड़ित देश में शांति स्थापित करने का अभूतपूर्व और महान काम करते हैं। वे किस देश के साथ कब खेला कर दें इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके गवाह ईरान सहित दुनिया के आधा दर्जन देश हैं । जहां उन्होंने शांति के बीच अशांति और उस अशांति के बीच शांति स्थापित करवाने का महान काम किया है। हमारे यहां एक कहावत है कि भूसा में अंगरा (अंगारा) डाल जमालो दूर खड़ी। कुछ लोग भाई की तुलना जमालो से करते हैं। इस व्यक्ति की झूठ की तो इतनी इंतहा है कि इस आदमी ने सच कब बोला होगा समझना ही नामुमकिन है। भाई की झूठ बोलने की स्पीड इतनी तेज है कि सुपर सोनिक मिसाइलें भी गति के मामले में उसके सामने फेल हैं। दुनिया के इतिहास में सर्वाधिक झूठ बोलने के मामले हिटलर की नाजी पार्टी के प्रचार मंत्री गोएबल्स का नाम प्रसिद्ध है।लेकिन अब माननीय ट्रंप महाराज ने उस नाम को भी मीलों पीछे छोड़ दिया है। इसके लिए नोबल पीस सम्मान तो बनता ही है। नोबल शांति सम्मान देने वाली स्वीडन और नार्वे को दुनियां में अमन का वास्ता है। उन्हें इस मामले में विचार कर भाई का नोबल शांति सम्मान दे ही देना चाहिए। तभी दुनिया में अमन कायम हो सकेगा।
हमारे यहां खेला होबे का सिलसिला पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में शुरू किया था। इसकी झलक शुक्रवार को लोकसभा के विशेष सत्र में देखने को मिली जब महिला आरक्षण बिल के साथ खेला हो गया। विपक्ष के दलों ने एकता का अद्भुत प्रदर्शन कर एनडीए का गेम बजा डाला। वैसे भी हमारे देश के नेताओं को खेला करने में और खेल बिगाड़ने में महारत हासिल है। फिर चाहे वो सत्ताधारी दल के नेता हो या विपक्ष के ही नेता ही क्यों न हों। इस काम में उन्हें जो महारत हासिल है वह अतुलनीय है। इस काम में उन्हें जो आत्मीय सुख मिलता है वह अवर्णीय है।
लोकसभा में एनडीए द्वारा पेश महिला आरक्षण बिल के साथ न केवल खेला किया बल्कि विपक्ष ने सत्ताधारी दलों का भी गेम बजा डाला । यह महत्वपूर्ण नहीं है कि सत्ताधारी दल इस बिल के बहाने विपक्ष के साथ खेला करना चाहता था या विपक्ष के दलों ने मिलजुल कर सत्ताधारी दल के साथ खेला कर डाला। पर इतना जरूर है कि दोनों ने एक दूसरे के साथ खेला करने के साजिश के चलते दोनों ने महिलाओं के साथ खेला कर दिया। 30 साल से महिलाओं के साथ यही खेला होता चला आ रहा है। यह सिलसिला आगे भी चले तो कोई आश्चर्य नहीं।
2024 के जून माह में इस शब्द का पहला असर हमारे देश में लोकसभा की 400 सीटों की जुगाड़ में निकली भाजपा को हुआ जब उसे बहुमत के ही लाले पड़ते नज़र आए। इसके दो माह बाद हमारे पड़ोसी बांग्लादेश की पीएम के साथ उस समय ही खेला हो गया जब उनको भारत आ कर अपनी जान बचाना पड़ी। दावा किया जाता है कि खेला होबे शब्द का ईजाद बांग्लादेश की निर्वासित पीएम की पार्टी के नेता शमीम उस्मान ने किया था। किस्मत का खेल देखिए कि उन्हीं की नेता के साथ खेला हो गया। इसे कहते हैं मियां की जूती मियां का सिर।
इसके दो दशक पहले इस शब्द का असर हमारे देश की सियासत पर उस समय देखने को मिला जब आधी सदी तक देश की सत्ता पर काबिज पार्टी के साथ खेला हो गया और देश को अटल बिहारी बाजपेई के रूप में पहला गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री मंत्री मिला। इसी सदी में पश्चिम बंगाल में भी 34 साल पुरानी सीपीएम सरकार के साथ खेला हो गया। 'खेला होबे' शब्द इस सदी का लोकप्रिय शब्द बन कर जनता की जुबान पर चढ़ गया है । बंगाली हो या गैर बंगाली सब ने इस शब्द को अपना बना लिया
बताया जाता है कि इस शब्द का भारत में प्रवेश हमारे देश की पूरब दिशा में स्थित पड़ोसी देश बांग्लादेश से हुआ। हमारे देश में इस शब्द का पहली बार उपयोग ममता बनर्जी द्वारा 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनावों में किया। चुनावों के बाद वहां इस शब्द का असर ऐसा हुआ कि वहां के हजारों लोगों को अपने घर बार छोड़कर कर आसपास के राज्यों में पनाह लेनी पड़ी। वे हिंसा के शिकार हुए।
खेला होबे शब्द भले ही बांग्ला भाषा से आया शब्द हो पर इसका उपयोग सारे देश में धड़ल्ले से किया जाता है। बता दें कि इसी शब्द का बोलचाल के दौरान समानार्थी शब्द है गेम होगा या गेम बजेगा। जब किसी व्यक्ति की योजना को असफल कर दिया जाता है तो उसके लिए भी गेम होने या गेम बजने जैसे ही शब्द का उपयोग किया जाता है।
एक बार फिर से पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधान सभा चुनाव में खेला होबे की गूंज सुनाई दे रही है। देखना है कि ही इस बार किसके साथ खेला होता है। ममता के साथ या मोदी के साथ। वैसे बंगाल में तो खेला होता ही रहता है। कभी हुमायूं कबीर के साथ खेला होबे तो कभी आई पैक वाले के साथ, तो कभी ईडी, सीबीआई के साथ ममता दीदी खेला कर देतीं हैं। दुनियां भरे में बंगाल का काला जादू प्रसिद्ध है। बचपन से हम सुनते चले आ रहे हैं कि काली कलकत्ते वाली तेरा बचन न जाए खाली। यह कलकत्ते वाली काली का ही जलवा है कि समूचा विपक्ष, फिर चाहे वो भाजपा हो, कांग्रेस हो या कम्युनिस्ट पार्टी हो सभी काली कलकत्ते वाली की निर्ममता से क्षतविक्षत है। इन सबके साथ खेला हो गया है।

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