विधानसभा चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। West Bengal, Tamil Nadu, Kerala और Assam में सामने आए रुझान सत्ता परिवर्तन और वापसी—दोनों की कहानी सुना रहे हैं। लेकिन इतिहास बताता है कि एग्जिट पोल और असली नतीजों के बीच अक्सर बड़ा अंतर रहा है।
बंगाल: एग्जिट पोल पर सवाल
Mamata Banerjee की पार्टी (TMC) के मामले में एग्जिट पोल कई बार चूक चुके हैं।
2021 में TMC को 130–140 सीटों का अनुमान था, लेकिन नतीजे में 213 सीटें मिलीं
बीजेपी को भी ज्यादा सीटें दिखाई गईं, जबकि वह 77 पर सिमट गई
इस बार भी रुझान सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन पिछले आंकड़े बताते हैं कि बंगाल में एग्जिट पोल पर आंख बंद कर भरोसा करना जोखिम भरा है।
तमिलनाडु: DMK की बढ़त के संकेत
(DMK) को 9 में से 6 एग्जिट पोल में बढ़त मिलती दिख रही है।
234 सीटों वाले राज्य में 118 का आंकड़ा जरूरी है और रुझान DMK की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं।
हालांकि 2016 जैसे चुनावों में एग्जिट पोल पूरी तरह उलट भी चुके हैं।
केरल: परंपरा बनाम अनुमान
(UDF) को इस बार बढ़त मिलती नजर आ रही है।
लेकिन केरल में एग्जिट पोल अपेक्षाकृत ज्यादा सटीक रहे हैं—
2021 और 2016 में अनुमान और नतीजों में ज्यादा अंतर नहीं था
यहां मुकाबला अक्सर सीधा और स्पष्ट रहता है
असम: बीजेपी की वापसी?
(BJP) को एग्जिट पोल में बढ़त दिखाई गई है।
126 सीटों वाले राज्य में 64 का बहुमत जरूरी है और पिछले चुनावों में एग्जिट पोल काफी हद तक सही साबित हुए हैं।
इस बार भी रुझान बीजेपी की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं।
असली तस्वीर कब साफ होगी?
सभी राज्यों में अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही होगा। एग्जिट पोल सिर्फ रुझान हैं, नतीजे नहीं।
एग्जिट पोल चुनावी माहौल को गर्म जरूर करते हैं, लेकिन उनकी विश्वसनीयता हर राज्य में अलग-अलग रही है।
बंगाल में ये अक्सर चूक जाते हैं
केरल और असम में अपेक्षाकृत सटीक रहे हैं
तमिलनाडु में तस्वीर बदल भी सकती है
यानी राजनीति में आखिरी शब्द सिर्फ जनता का होता है—और वह EVM खुलने के बाद ही सामने आता है।

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