मुंबई के अंडरवर्ल्ड से लेकर दुबई की रियल एस्टेट तक फैले नेटवर्क पर आखिरकार कानून का शिकंजा कसता दिख रहा है। (ED) को बड़ी सफलता मिली है, जब विशेष अदालत ने गैंगस्टर Iqbal Mirchi से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति दे दी।
अदालत का सख्त रुख
मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने Fugitive Economic Offenders Act, 2018 (FEOA) के तहत ED को अतिरिक्त संपत्तियां अटैच करने की मंजूरी दी है।
यह कार्रवाई कानून की धारा 5(1) के तहत की जाएगी, जबकि आगे की जांच में सामने आने वाली संपत्तियों को शामिल करने के लिए धारा 13 के तहत सप्लीमेंट्री आवेदन की भी इजाजत दी गई है।
मुंबई से दुबई तक फैला साम्राज्य
जांच में सामने आई संपत्तियां सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं:
मुंबई (वर्ली): राबिया मेंशन, मरियम लॉज और सी व्यू जैसी प्राइम लोकेशन की जमीनें
दुबई: होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और कॉर्पोरेट बे व DEC टावर्स की 14 रियल एस्टेट यूनिट्स
करीब 4,970 वर्ग मीटर में फैली इन संपत्तियों की कीमत अब सैकड़ों करोड़ में आंकी जा रही है।
‘प्रॉक्सी गेम’ का खुलासा
ED के मुताबिक, इन संपत्तियों को सीधे अपने नाम पर रखने के बजाय:
ट्रस्ट और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया
परिवार के सदस्यों—आसिफ, जुनैद और हाजरा मेमन—को सामने रखा गया
डमी किरायेदारों के जरिए असली मालिकाना हक छिपाया गया
यानी ‘बेनामी’ नेटवर्क के जरिए काले धन को सफेद करने का पूरा तंत्र खड़ा किया गया था
पुराना केस, नई परतें
2019–2020 में इन संपत्तियों को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया था
2021 में अदालत ने मिर्ची और उसके सहयोगियों को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया
अब नई जांच में सामने आई संपत्तियों को भी दायरे में लाया जा रहा है
बड़ा सवाल: क्या ‘डी-कंपनी’ पर निर्णायक चोट?
यह कार्रवाई सिर्फ एक गैंगस्टर की संपत्तियों तक सीमित नहीं है। D-Company के नेटवर्क पर यह सीधी चोट मानी जा रही है।
लेकिन असली चुनौती अब भी बाकी है—
क्या जब्ती के बाद इन संपत्तियों का वास्तविक आर्थिक मूल्य वसूल हो पाएगा?
क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकेगा?
यह कार्रवाई दिखाती है कि कानून की पहुंच अब सीमाओं से परे जा रही है। लेकिन यह भी सच है कि अंडरवर्ल्ड की जड़ें जितनी गहरी हैं, उन्हें खत्म करने के लिए सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि लगातार और समन्वित प्रयास की जरूरत होगी।
फिलहाल इतना तय है—मिर्ची की ‘मिर्च’ अब कानून की आंच में जलने लगी है।

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