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इंदौर में क्राइम ब्रांच के थाना प्रभारी और सिपाही पर रिश्वत लेने का आरोप, लोकायुक्त-कमिश्नर ने बैठाई जांचCrime Branch Station In-charge and Constable in Indore Accused of Accepting Bribes; Lokayukta Commissioner Orders Inquiry

 

इंदौर। क्राइम ब्रांच में पदस्थ थाना प्रभारी (टीआई) सुजीत श्रीवास्तव लेनदेन के मामले में फंस गए है। एक युवक ने ऑनलाइन रुपये लेने का आरोप लगाया है। टीआई और उनके करीबी सिपाही पर जांच बैठा दी गई है। इसके पूर्व खजराना थाना में पदस्थापना के दौरान टीआई सट्टाकांड में फंस चुके है।


टीआई सुजीत श्रीवास्तव साइबर अपराध संबंधित आवेदन की जांच कर रहे थे। शिकायतकर्ता(युवती) ने परिचित युवक पर सोशल मीडिया(टेलीग्राम) पर आपत्तिजनक फोटो वायरल करने का आरोप लगाया था। टीआई ने युवक को कॉल कर बुलाया और उसका फोन व लेपटाप रख लिया। बदले में युवक से रुपयों की मांग की गई।

रंगे हाथ पकड़ने की योजना थी

50 हजार रुपये सिपाही विकास के मोबाइल पर ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। इसके बाद मामला लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के पास पहुंचा और टीआई को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनी। हालांकि इसके पूर्व सिपाही और टीआई कार्यालय से गायब हो गई। अफसरों ने घटना को गंभीरता से लिया है।

डीसीपी(क्राइम) ने टीआई से समस्त जांच आवेदन वापस ले लिए है। उनके खिलाफ जांच भी बैठा दी गई है। टीआई खजराना थाना में रह चुके हैं। तत्कालीन आईपीएस की टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर लाखों रुपये का सट्टा पकड़ा था। तत्कालीन डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने टीआई की संलिप्तता बता दी थी।

अफसरों के जाने के बाद रात में तोड़बट्टा कर रहे थे टीआई

अफसरों का दावा है कि टीआई का चाल चलन ठीक नहीं था। कर्मचारियों ने बताया टीआई रात में ऑफिस आते थे। इस दौरान जांच के बहाने आवेदक और अनावेदकों को बुलाया जाता था। दोनों पक्षों से शुभलाभ कर समझौता करवा देते थे।

इस घटना के बाद डीसीपी ने एडिशनल डीसीपी(अपराध)राजेश दंडोतिया और एसीपी, जांचकर्ता, अनुसंधानकर्ताओं को पत्र लिख कर चेताया कि अनुसंधान के दौरान अनावश्यक आवेदक और अनावेदकों के साथ विचरण न करें। जांच, बयान और पूछताछ कार्यालय में ही करें।

चालान में देरी की, सीपी ने जांच करवाई

टीआई सुजीत श्रीवास्तव पर धोखाधड़ी के आरोपी की मदद का आरोप भी लगा है। पुलिस आयुक्त ने इसकी जांच करवाई है। टीआई ने 90 दिन के अंदर चालान प्रस्तुत नहीं किया था। इस कारण आरोपित की जमानत हो गई।

कोर्ट ने भी इस लापरवाही पर टिप्पणी की और अफसरों को पत्र लिखा। टीआई के अनुसार लेनदेन के आरोप गलत है। सिपाही ने रिश्वत नहीं ली बल्कि पोर्टर को रुपये देने के लिए अनावेदक ने स्वयं ट्रांसफर किए थे। अपराध से बचने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे है।

आपत्तिजनक अवस्था में पकड़े गए एसआई की छुट्टी

खजराना थाना के तत्कालीन एसआइ सुरेश बुनकर की विभाग से छुट्टी कर दी है। एसआई को रहवासियों ने एक महिला के साथ पकड़ कर बांधा था। उसकी पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। पुलिस आयुक्त संतोष कुमारसिंह ने विभागीय जांच करवाई थी।

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