डॉ . मोनिका वर्मा
MBBS, MS( Obs&Gyn) , FMAS
गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर भारत में महिलाओं के बीच एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह देश में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित होती हैं—फिर भी यह एक ऐसा कैंसर है जिसे समय रहते रोका और ठीक किया जा सकता है।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति (Statistics)
भारत में 2022 में लगभग 1.27 लाख (127,000+) नए मामले सामने आए. इसी वर्ष लगभग 79,000 से अधिक महिलाओं की मृत्यु इस कैंसर से हुई.यह भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है.
चिंताजनक बात यह है कि केवल लगभग 2% महिलाओं की ही नियमित स्क्रीनिंग होती है. लगभग 60–70% मामलों का पता देर से (advanced stage) में चलता है.
ये आंकड़े साफ बताते हैं कि समस्या बीमारी से ज्यादा जागरूकता और जांच की कमी की है।
सर्वाइकल कैंसर क्या है?
यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (ग्रीवा) में होता है। आम भाषा में इसे बच्चेदानी का मूँह भी कहा जाता है। इसका मुख्य कारण Human Papillomavirus (HPV) संक्रमण है, जो आमतौर पर यौन संपर्क से फैलता है।
लक्षण (Symptoms)
शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए जांच जरूरी है। इस HPV संक्रमण को आगे चल कर कैंसर बननें में 15 से 20 साल लग जाते हैं। इसीलिए इस संक्रमण और कैंसर के microscopic बदलाव को जानना बहुत ज़रूरी है। ये कैंसर हमें इतना लंबा समय देता है जब हम कैंसर के प्रारंभिक चेंजस् का पता लगा कर इस गंभीर जानलेवा बीमारी को पूरी तरह हरा सकते हैं। प्रारंभिक अवस्था में पता लगने पर इसका इलाज बहुत आसान और पूर्ण होता है।सही समय पर इस कैंसर को नहीं पकड़ने पर आगे चलकर निम्न लक्षण पाए जा सकते हैं :
मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव
असामान्य रक्तस्राव
संभोग के बाद ब्लीडिंग
पेल्विक दर्द
असामान्य डिस्चार्ज। ये लक्षण जब किसी महिला मे आते हैं, तब तक आममूमन बहुत देर हो चुकी होती है।
बचाव (Prevention)
HPV वैक्सीन लगवाएं। sexual activity से पहले ( जिसके द्वारा ये HPV संक्रमण शरीर मे आता है) , 9 से 15 वर्ष की कन्याओ को HPV वैक्सीन की 2 डोसेस लगाई जाती हैं। इसके बाद 4t साल तक की महिलाएं इस वैक्सीन की 3 डोसेस लगवा कर इस गंभीर कैंसर से बचाव पा सकती हैं।
नियमित Pap smear test करवाएं। ये एक ऐसा टेस्ट है जिसमे विशेषज्ञ सर्विक्स के उपर से कुछ सेल्स को ले कर microscopy द्वारा सर्विक्स कैंसर के शुरुआती चेंजस् देख सकते हैं। ये टेस्ट हर sexually active महिला को हर 3 साल मे करवाना चाहिए। इस pap smear के साथ HPV DNA का भी टेस्ट कर सकते हैं। इस दोहरे टेस्ट ( co-test) को हर 5 साल मे एक बार करवाया जाता है।
सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं। कॉंडोम का इस्तमाल सभी STDs से बचाव देता है। multiple partners न हो कर किसी एक से वफादारी बहुत उपयोगी होती है।
धूम्रपान से बचें। धूम्रपान न सिर्फ रेस्पिरेटरी/ कार्डियाक कैंसर करवाता है अपितु सर्विक्स कैंसर भी करवाता है।
क्यों जरूरी है जागरूकता?
भारत में अधिकतर महिलाएं शर्म, डर या जानकारी की कमी के कारण समय पर जांच नहीं करवातीं। यही कारण है कि कई मामलों में बीमारी देर से पता चलती है, जब इलाज कठिन हो जाता है।
सर्वाइकल कैंसर एक रोकथाम योग्य (preventable) बीमारी है। सही जानकारी, वैक्सीनेशन और नियमित जांच से हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। आज जरूरत है कि हर महिला अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे—क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

Post a Comment