नई दिल्ली। आगामी संसद सत्र को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय संसद सत्र में इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने और देशभर में इसके समर्थन में माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हाई-लेवल बैठक में बनी रणनीति
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और महिला नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर, सांसद कमलजीत सहरावत, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान अश्विनी वैष्णव ने 10 पेज का पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन भी दिया, जिसमें विधेयक के प्रचार और राजनीतिक रणनीति का खाका पेश किया गया।
मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक
इसके बाद नितिन नबीन ने बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इसमें “नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम” को लेकर राज्यों में बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए।
तीन स्तर पर चलेगा अभियान
सूत्रों के अनुसार पार्टी ने इस विधेयक को लेकर तीन चरणों में रणनीति बनाई है—
संसद में पेश होने से पहले: जागरूकता अभियान और जनसमर्थन तैयार करना
संसद में पारित होने के दिन: विशेष कार्यक्रम और महिला भागीदारी बढ़ाना
पारित होने के बाद: देशव्यापी प्रचार और कार्यक्रम आयोजित करना
सांसदों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर संसद सत्र में समय से पहुंचने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
पीएम मोदी का बड़ा कार्यक्रम
नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को दिल्ली में महिला कार्यकर्ताओं और महिला उद्यमियों को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही पार्टी सोशल मीडिया पर महिला हस्तियों को जोड़कर इस मुद्दे को व्यापक बनाने की तैयारी में है।
संसद सत्र के दौरान महिला प्रतिनिधियों और प्रमुख हस्तियों को दर्शक दीर्घा में बुलाने की योजना है, ताकि विधेयक को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जा सके।
देशभर की महिला प्रतिनिधियों से संपर्क
बीजेपी देशभर के स्थानीय निकायों की महिला प्रतिनिधियों से संपर्क कर रही है, ताकि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सत्र के दौरान और बाद में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।
कैबिनेट मंजूरी पर सस्पेंस
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद सत्र जारी रहने के कारण सरकार इस पर फिलहाल सार्वजनिक बयान देने से बच रही है, ताकि विपक्ष की ना piराजगी से बचा जा सके।

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