इंदौर स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे विवाद में अब अदालत के भीतर तीखी बहस सामने आई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रुख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
“कभी मंदिर नहीं, कभी मस्जिद नहीं… अब क्या है?”
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील शोभा मेनन ने अदालत में कहा कि ASI के बयान आपस में टकराते हैं।
उनका आरोप था कि पहले ASI ने इसे “न मंदिर, न मस्जिद” बताया था, लेकिन अब इसे मंदिर के रूप में पेश किया जा रहा है।
सीधा सवाल उठाया गया —
क्या जांच एजेंसी खुद अपने ही पुराने रिकॉर्ड से मुकर रही है?
“न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश”
वकील मेनन ने कोर्ट में यह भी कहा कि ASI का बदला हुआ रुख न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
अगर एक सरकारी संस्था ही अपने निष्कर्षों में स्थिर नहीं है, तो सच सामने कैसे आएगा?
विवाद की जड़ क्या है?
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है।
एक पक्ष इसे प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का हिस्सा बताता है।
इसी को लेकर पूजा और नमाज के अधिकार पर लगातार कानूनी लड़ाई जारी है।
ASI पर बढ़ा दबाव
अदालत में उठे सवालों के बाद ASI की भूमिका पर दबाव बढ़ गया है।
अब कोर्ट यह देखेगा कि एजेंसी अपने निष्कर्षों को कैसे स्पष्ट करती है और क्या वह अपने पुराने व नए स्टैंड के बीच अंतर को सही तरीके से समझा पाती है या नहीं।
आगे क्या?
इस मामले में अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है।
कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच रिपोर्ट और ऐतिहासिक दावों को किस तरह से देखा जाएगा।
निष्कर्ष: सिर्फ इतिहास नहीं, भरोसे की भी परीक्षा
भोजशाला विवाद अब सिर्फ आस्था या इतिहास का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह संस्थाओं की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन चुका है।
अगर जांच एजेंसियों के बयान ही बदलते रहें, तो सच्चाई तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है।
फिलहाल अदालत में सवाल गूंज रहा है —
सच क्या है, और कौन उसे बदल रहा है?

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