राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाला की जांच के बीच एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी सुबोध अग्रवाल ने पूछताछ के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधांश पंत का नाम लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
क्या कहा सुबोध अग्रवाल ने?
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों के सामने अग्रवाल ने दावा किया है कि जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें से करीब 600 करोड़ रुपये के 33 प्रोजेक्ट्स उस अवधि से जुड़े हैं जब सुधांश पंत अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर थे।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप जांच के दायरे में हैं और अभी किसी भी स्तर पर आधिकारिक रूप से दोष साबित नहीं हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए जल आपूर्ति की योजना लागू की गई थी
आरोप है कि इस योजना में टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन और भुगतान में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं
कई ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया काम और फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
राजस्थान में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) इस मामले की जांच कर रही है
सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया है
अब अग्रवाल के बयानों के आधार पर अन्य अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है
सुधांश पंत की स्थिति
सुधांश पंत वर्तमान में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
अभी तक उनकी ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है
जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगी
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
इस खुलासे के बाद:
राज्य की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमाने लगा है
विपक्ष सरकार पर हमलावर हो सकता है
प्रशासनिक स्तर पर बड़े अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई हे
जल जीवन मिशन घोटाले में सुबोध अग्रवाल का यह बयान जांच को नई दिशा दे सकता है, लेकिन अंतिम सच्चाई पूरी जांच और सबूतों के आधार पर ही सामने आएगी। फिलहाल यह मामला राजस्थान की नौकरशाही और राजनीति, दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

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