मध्य प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इंदौर में लंबे समय से चर्चा में रहे नाम—गोपीकृष्ण नेमा और सुदर्शन गुप्ता—अब दौड़ से लगभग बाहर माने जा रहे हैं। दोनों नेताओं को अलग-अलग जिलों का प्रभार मिलने के बाद उनके नाम प्राधिकरण अध्यक्ष की रेस से पीछे हो गए हैं।
इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल, जबलपुर, कटनी, देवास और रतलाम जैसे शहरों में भी प्राधिकरण अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर इंतजार बना हुआ है। अब तक इन शहरों में किसी भी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में लगातार अटकलों का दौर जारी है।
राजधानी में हाल ही में सत्ता और संगठन की समन्वय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि सरकार के पास अब सीमित समय—करीब ढाई साल—बचा है, ऐसे में ऐसे चेहरों को जिम्मेदारी दी जाए जो कम समय में ज्यादा परिणाम दे सकें। यही कारण है कि सिर्फ राजनीतिक संतुलन ही नहीं, बल्कि कार्यक्षमता और जमीन से जुड़ाव को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण नियुक्तियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। इंदौर के मामले में मुख्यमंत्री की पसंद को भी तरजीह दी जा रही है, लेकिन संगठन के साथ संतुलन साधना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अब तक केवल उन्हीं दावेदारों के नाम सामने आए हैं, जो लंबे समय से चर्चा में हैं, लेकिन अंदरखाने चौंकाने वाले नामों पर भी विचार चल रहा है। उज्जैन और ग्वालियर में पहले ही समन्वय के आधार पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, जहां स्थानीय क्षत्रपों की पसंद को महत्व दिया गया।
सबसे अहम बात यह सामने आई है कि “इंदौर का मामला होल्ड पर है”—यह सिर्फ एक धारणा है। असल में प्रदेश के कई बड़े शहरों में एक साथ नियुक्तियां लंबित हैं, इसलिए इंदौर को अलग से रोका नहीं गया है।
इंदौर विकास प्राधिकरण को प्रदेश का सबसे प्रभावशाली माना जाता है, खासकर जमीन और निर्माण से जुड़े बड़े फैसलों के कारण। इसी वजह से इस पद पर किसे बैठाया जाएगा, इसे लेकर सरकार और संगठन दोनों स्तर पर गहन मंथन चल रहा है।
अब संकेत मिल रहे हैं कि यह इंतजार ज्यादा लंबा नहीं होगा और जल्द ही इंदौर समेत अन्य शहरों के प्राधिकरण अध्यक्षों के नामों का ऐलान किया जा सकता है। फिलहाल सियासी गलियारों में चर्चा तेज है और हर दिन नए समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

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