ईरान ने लंबे युद्ध के बाद भी अपनी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाकर रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके पास अब भी करीब 40% ड्रोन और 60% से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर मौजूद हैं। इसके अलावा बंकरों से लगभग 100 सिस्टम निकालकर फिर सक्रिय किए गए हैं, जिससे उसकी ताकत और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए खतरा बन सकता है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ईरान के कुल हथियारों का सटीक आंकड़ा बताना मुश्किल है, लेकिन उसकी सैन्य क्षमता इतनी जरूर है कि वह समुद्री यातायात को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम कितना टिकेगा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन ईरान ने अपनी ताकत जरूर दिखाई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान की बड़ी रणनीतिक ताकत बताया।
पिछले साल जून में इजराइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले और बाद में अमेरिका के शामिल होने के बावजूद ईरान ने होर्मुज को बंद नहीं किया था। एक पूर्व इजरायली अधिकारी के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस कदम से इसलिए परहेज किया क्योंकि इससे अन्य देशों के युद्ध में कूदने का खतरा था।
इतिहास में भी ईरान 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछा चुका है। अब विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान पारंपरिक तरीकों की बजाय मिसाइल और ड्रोन के जरिए समुद्री रास्तों को निशाना बनाने की रणनीति अपना रहा है।

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