मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है। 15 अप्रैल से चार दिन तक जिलाध्यक्षों के कामकाज की गहन समीक्षा की जाएगी। इस “परफॉर्मेंस टेस्ट” के जरिए यह तय होगा कि कौन संगठन को आगे बढ़ा रहा है और कौन पीछे खींच रहा है।
क्या होगा इस 4 दिन की समीक्षा में?
हर जिले के अध्यक्ष से संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट ली जाएगी
बूथ स्तर तक सक्रियता, सदस्यता अभियान और जनसंपर्क का मूल्यांकन
आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता की जांच
पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी और वरिष्ठ नेताओं से तालमेल भी देखा जाएगा
किन पर गिरेगी गाज?
सूत्रों के मुताबिक:
जो जिलाध्यक्ष लगातार निष्क्रिय पाए गए
जिन जिलों में चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहा
जहां संगठन में गुटबाजी या विवाद ज्यादा हैं
ऐसे पदाधिकारियों को हटाया जा सकता है या जिम्मेदारी बदली जा सकती है।
क्यों जरूरी हुई यह “परीक्षा”?
आगामी चुनावों से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर एक्टिव करना
कमजोर जिलों में नई टीम और नई ऊर्जा लाना
भाजपा के मजबूत नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए संगठनात्मक सुधार
क्या मिल सकता है मैसेज?
यह साफ संकेत है कि अब पार्टी में “परफॉर्म या बाहर” का फॉर्मूला लागू होगा। मेहनती और सक्रिय नेताओं को आगे बढ़ाने की तैयारी है, जबकि सिर्फ पद पर बैठे रहने वालों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है।

Post a Comment