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भारत-रूस रक्षा साझेदारी मजबूत: 3,000 सैनिकों की तैनाती और युद्धपोत-फाइटर जेट भेजने पर सहमतिIndia-Russia Defense Partnership Strengthens: Agreement Reached on Deployment of 3,000 Troops and Dispatch of Warships and Fighter Jets

 

भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिली है। 2025 में हुआ RELOS (परस्पर रसद आदान-प्रदान) समझौता अब प्रभावी हो गया है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के यहां सैन्य संसाधनों की तैनाती कर सकेंगे।


समझौते के मुताबिक दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर तीन-तीन हजार सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमान तक तैनात कर सकते हैं। इन सैनिकों की तैनाती सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर की जा सकेगी। यह समझौता फिलहाल पांच साल के लिए लागू रहेगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

रूसी एजेंसी स्पुतनिक के अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल सहयोग में बड़ा इजाफा होगा। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर दोनों देश आपस में संसाधनों का आदान-प्रदान “वस्तु विनिमय” के आधार पर भी कर सकेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते से भारत की रणनीतिक पहुंच आर्कटिक क्षेत्र तक बढ़ेगी। रूस के मरमांस्क और सेवेरोमोर्स्क जैसे बड़े बंदरगाहों तक भारत को पहुंच मिल सकेगी, जिससे वैश्विक समुद्री गतिविधियों में उसकी भागीदारी बढ़ेगी।

यह समझौता लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में समय और लागत दोनों बचाने में मदद करेगा। रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना से रसद सहयोग मिलने की उम्मीद है, जबकि भारत को रूस के उत्तरी समुद्री मार्गों तक पहुंच का फायदा मिलेगा।

गौरतलब है कि भारत का अमेरिका के साथ भी इसी तरह का समझौता LEMOA पहले से मौजूद है, लेकिन RELOS में सैनिकों की तैनाती का प्रावधान इसे अलग बनाता है।

वहीं, रक्षा क्षेत्र में सहयोग के तहत S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त इकाइयों को भी मंजूरी मिल चुकी है। भारत को कुल पांच बैटरियां मिलने की उम्मीद है, जिनमें से कुछ की डिलीवरी जारी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता भारत-रूस के दशकों पुराने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करेगा और वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की सैन्य और कूटनीतिक स्थिति को मजबूती देगा।

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