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3 महीने में कोर्ट का इंसाफ, ताउम्र सलाखों में रहेगा 3 माह की मासूम से दुष्कर्म करने वाला ताऊJustice Delivered by Court in Three Months: Uncle Who Raped 3-Month-Old Infant to Spend Lifetime Behind Bars

 


मुरैना: आखिरकार लगभग तीन महीने के बाद दुष्कर्म पीड़िता मासूम बच्ची को इंसाफ मिल गया है. 22 अप्रैल बुधवार शाम को 3 माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म करने वाले आरोपी ताऊ को जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है.


पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए महज 15 दिनों में विवेचना पूरी कर अदालत में चालान पेश किया. वहीं न्यायालय ने भी गंभीरता समझते हुए केवल 3 महीने के बाद सुनवाई पूरी कर आरोपी को कड़ी सजा दी. यह फैसला साफ तौर पर दर्शाता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति कानून और कोर्ट दोनों अब बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं.

ताऊ ने की थी बच्ची से दरिंदगी

मीडिया सेल प्रभारी (अभियोजन) रश्मि अग्रवाल के अनुसार, ''घटना 30 दिसंबर 2025 की है, जब फरियादिया अपनी सास और पति के साथ शहर के स्टेशन रोड थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई. फरियादिया ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे वह अपने 4 साल के बेटे को पानी पिला रही थी और 3 माह की बच्ची सो रही थी. इसी दौरान आरोपी, जो रिश्ते में जेठ लगता है, बच्ची को खिलाने के बहाने आया और मौका पाकर उसे अपने कमरे में ले गया.


कुछ देर बाद बच्ची के रोने की आवाज सुनकर जब मां वहां पहुंची तो आरोपी बच्ची को देकर मौके से भाग गया. बच्ची की हालत गंभीर थी और उसके निजी अंग से खून निकल रहा था. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्काल विवेचना शुरू की. विवेचना के दौरान घटनास्थल से जब्त साक्ष्य, आरोपी के रक्त नमूने और पीड़िता से प्राप्त साक्ष्यों का डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट आरोपी के खिलाफ सकारात्मक आई.

15 दिन में जांच, 3 महीने में सुनवाई पूरी

जिला न्यायालय के ADPO इन्द्रेश कुमार प्रधान ने बताया, ''पुलिस थाना स्टेशन रोड ने मात्र 15 दिनों में विवेचना पूरी कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने भी तेजी दिखाते हुए लगभग 3 महीने में सुनवाई पूरी कर अभियोजन के मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से सहमत होते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और सख्त सजा सुनाई है.''

इस प्रकरण में प्रभारी उप-संचालक (अभियोजन) रोशनलाल छापरिया के मार्गदर्शन में विशेष लोक अभियोजक इन्द्रेश कुमार प्रधान ने प्रभावी पैरवी की. यह फैसला समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि मासूमों के साथ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

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