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मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे, पर 25 साल पुराने विवाद ने बढ़ाई सम्राट चौधरी की मुश्किलेंSamrat Chaudhary is leading the race for Chief Minister, but a 25-year-old dispute has compounded his troubles.



नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की चर्चाओं के बीच बिहार का अगला सीएम कौन होगा, इसको लेकर पिछले कई दिनों से सियासी हलचल तेज है। इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के नाम को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की रेस में वे फिलहाल सबसे आगे हैं। हालांकि, उनकी ही पार्टी के भीतर कुछ नेता उनके नाम का विरोध भी कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश जारी है। अंतिम फैसला पार्टी का आला कमान ही करेगा।

सम्राट चौधरी के नाम पर NDA में मतभेद

नीतीश कुमार के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री भी उनकी तरह साफ-सुथरी छवि वाला हो, इस पर जेडीयू सबसे ज्यादा जोर दे रही है। जेडीयू की इसी मांग को आधार बनाकर बीजेपी के भीतर भी कुछ नेता सम्राट चौधरी के नाम का विरोध कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सम्राट चौधरी के नाम पर सिर्फ बीजेपी में ही नहीं, बल्कि जेडीयू के अंदर भी असहमति देखने को मिल रही है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सिर्फ बीजेपी का नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन का होगा। इसलिए यह फैसला केवल भाजपा का आंतरिक मामला नहीं है। उनका यह भी कहना है कि अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उनकी तुलना नीतीश कुमार से की जाएगी। ऐसे में सम्राट चौधरी से जुड़े विवादों को विपक्ष मुद्दा बना सकता है, जिससे सरकार की किरकिरी होने की आशंका है।

कम उम्र में मंत्री बनने पर उठा विवाद

समता पार्टी छोड़कर जब सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी आरजेडी में शामिल हुए, तो इसके बाद 19 मई 1999 को आरजेडी ने सम्राट चौधरी को राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि मंत्री बनने के समय वे बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। साथ ही, उस वक्त उनकी उम्र भी 25 वर्ष पूरी नहीं हुई थी। इस मामले को लेकर समता पार्टी के तत्कालीन नेता (अब दिवंगत) रघुनाथ झा और पी.के. सिन्हा ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके साथ ही संबंधित दस्तावेज भी सौंपे गए थे। तत्कालीन राज्यपाल ने इस मामले की जांच के आदेश देते हुए 25 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

सम्राट चौधरी पर दर्ज हुई थी शिकायत

निर्वाचन अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि सम्राट चौधरी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। साथ ही वे यह साबित करने में भी विफल रहे कि मंत्री बनने के लिए उन्होंने आवश्यक उम्र पूरी कर ली थी। निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने 16 नवंबर 1999 को राजभवन से अधिसूचना जारी कर सम्राट चौधरी को नाबालिग होने के आधार पर राबड़ी देवी मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया था।

इसके साथ ही राज्यपाल ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सम्राट चौधरी के खिलाफ धोखाधड़ी और गलत बयानी का मामला दर्ज किया जाए और मंत्री के रूप में उन्हें मिले वेतन व भत्तों की वसूली भी की जाए। राजभवन की इस अधिसूचना के बाद राजनीतिक हलकों में काफी बवाल मच गया था।

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