दस्तावेजों में छेड़छाड़, फर्जी मालिक खड़ा कर न्यायपालिका को गुमराह किया
जिला प्रशासन ने भूमाफिया की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर करीब 2000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बनाने की योजना रची थी। तत्कालीन तहसीलदार नीरज श्रीवास्तव को गुमराह कर उनसे गलत बयानी करवाई गई। इसके लिए 'सुकरु' मल्लाह नाम का फर्जी भूस्वामी खड़ा किया गया। अब इसी सुकरु मल्लाह की आड़ में असली भूमाफिया अदालत में केस लड़ रहे थे। सरकारी बाण सागर कॉलोनी को पूरी तरह निजी कराने का खेल चल रहा था। जिसका आराजी नम्बर 56 है। जांच में पांच मुख्य साजिशकर्ताओं के चेहरे उजागर हो चुके हैं। इन लोगों ने न केवल इस जमीन पर फर्जीवाड़ा किया, बल्कि कई अन्य सरकारी भूमि पर भी अपने नाम फर्जी दावे दर्ज कराए हुए हैं। प्रशासन ने इनकी बनाई जा रही कुंडली और नापी जा रही गर्दन को पकड़ लिया है। जिला प्रशासन अब इन सभी फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। यह मामला भूमि घोटालों में नए आयाम जोड़ रहा है।
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